माँ जगदम्बा!
माँ जगदम्बा!

चैत्र मास वासंतिक आया , शुभारम्भ है खास।
तेजस स्वरूप माँ जगदम्बा, जागी मन में आस।।
खल संहारक मात भवानी, देना निर्भय दान।
भारत भू का हर बाशिंदा, पाएं जग में मान।।

स्वरचित तथा मौलिक,
कुसुम अशोक सुराणा, मुंबई, महाराष्ट्र।
इस पर लोग क्या कह रहे हैं