23371023710modify फिर वही सुबह फिर वही शाम फिर वही सुबह औरफिर वही शामक्या है जीवन !क्या है मृत्यु !क्या है इसकाअंतिम मुकाम !हंसते चेहरेरोते चेहरेकुछ गंभीर औरकुछ घनेरे कुछ उलझ गयेकुछ सुलझ गयेकुछ अधर में हीझुलस गयेकरते-करते ही आरामफिर वही सुबह औरफिर वही शाम......समय का पहियाबढ़ता जायेहर पल, पल-पलचलता जायेगुजरे दिन औरगुजरी रातेंबीते सावनऔर बरसातेंन ही करताहै विश्रामफिर वही सुबह औरफिर वही शाम......गुजरे पल कोछोड़ करजीवन को कुछमोड़करआगे बढ़ तूआगे चलबदल दे तूअपना वो कलजिसके सपने देख रहाजिसको तू है खोज रहाजी ले जीवनपा ले मृत्युयही है तेराअंतिम मुकामफिर वही सुबह औरफिर वहीं शाम.....LabelDirected by द्वारा Kapil TiwariShared05 Sep 2025Start05 Sep 2025End05 Sep 2030 The Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैंटिप्पणी लिखेंNorman Sales08-Dec-2025CommentLikeबहुत सुन्दर कविता लिखी है। मैं आपकी लेखनी की सराहना करता हूँ।Khushi Jain01-Mar-2026CommentLikeबहुत बढ़िया लिखा है। Jain Mikhil21-Jun-2026CommentLikeअत्त्युत्तम सृजन। जय हो। फिर वही सुबह फिर वही शाम © टिप्पणी400 characters remainingजमा करेंरद्द करें