इश्क़ का तिलिस्म
इश्क़ का तिलिस्म

इश्क़ का तिलिस्म, क्या रंग लाता है,
दिल को हर घड़ी ये समझाता है।
न कोई राह, न कोई मंज़िल का पता,
फिर भी दिल हर लम्हा बहलाता है।

आँखों में ख्वाब, होठों पर दुआ,
जैसे चाँदनी में छुपा कोई राज़ हुआ।
इश्क़ की दुनिया, इक जादू सा लगे,
हर दर्द में भी बस सुकून ही जगे।


    द्वारा Yogesh Awasthi
    Shared31 Jan 2025
    Start31 Jan 2025
    End31 Jan 2030
    इस पर लोग क्या कह रहे हैं