44660646606modify माहिया छंद रचनामाहिया छंद१)पागल परवाना है,लौ में जल जाये,प्रेमी दीवाना हैं। २)बुंदें रिमझिम आयी,यादें बरसाती,नैना बदरी छायी।३)चंदा ने की चुगली,साजन की सजनी,दीवानी हैं पगली।४) हाथों में हाथ धरे,हम तुम साथ चले,प्रीती मकरंद भरे।५)सतरंगे हैं सपने। धरती हैं प्यासी, झर झर झरते झरने। LabelDirected by द्वारा चंचल जैनShared03 Jan 2025Start03 Jan 2025End03 Jan 2030 The Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैंटिप्पणी लिखेंसोनी सुराना04-Jan-2025CommentLike1बहुत अच्छी तुकांत कविता. बहुत पसंद आई. Yuvit Sonu Jain02-Mar-2025CommentLikeआपकी लेखनी प्रशंसनीय हैBhavesh Jain03-Sep-2025CommentLikeवाह! बहुत खूब... 🩷🩷Sundeep Jain10-Jan-2026CommentLikeवाह! बहुत खूब... 🩷🩷माहिया छंद रचना© टिप्पणी400 characters remainingजमा करेंरद्द करें