उड़ान...
उड़ान...

ख़्वाबों के गुब्बारों में,
हौसलों से जान भर,
आसमान छूना है!

सपनों के मचान चढ़,
बाज सी उड़ान भर,
शिखरों को पाना हैं!

अधूरे ख्वाबों की सेज,
ख्वाइशों के गुलाब से,
फिर महकानी है!

जिंदगी की किताब में
जीत के मोरपंख,
होले से छुपाने हैं !

भूले-बिसरे ख़्वाबों में,
टेड़ी-मेढी रेखाओं में,
रंग नए भरने हैं!

स्वरचित तथा मौलिक,

द्वारा कुसुम अशोक सुराणा

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