शीर्षक : अपना नहीं...
किसी का एक्सीडेंट हुआ है..
बहुत भीड़ लगी हुई है..
किसी को किसी वाहन ने टक्कर मारी है जिससे घायल एक नौजवान सडक के किनारे पड़ा दर्द से कराह रहा है..
काफ़ी लोग मोबाइलों से विडिओ बनाने में व्यस्त हैँ..
तभी बदहवास ही दो महिलाएं दौड़कर उस घायल की तरफ आती हैँ.. और देखकर कहतीं हैँ.. अरे ये अपना रोहन नहीं है..
चहरे पर ख़ुशी छा जाती है कि ये कोई अपना नहीं था..
अभी पहले दोनों के चेहरे पर हवाइयाँ उड़ रहीं थी कि ये उसका कोई है.. लेकिन जैसे ही उन्होंने देखा कि ये तो कोई और है.. उनके चहेरे का ग़म दूर हो गया अंदर कोई ग़म का नामो निशां नहीं था..
वो वापस अपने रास्ते हो लीं.. क्योंकि ये उनका कोई अपना नहीं था इसलिए मानवता मर गईं.. इन्होंने उसकी कोई मदद करना मुनासिब नहीं समझा....
द्वारा मोहन शर्मा