अम्बे मां सुख समृद्धि जग की खातिर लेकर आई अम्बे मां
अश्विन मास जो आया तो हर ओर है छाईं अम्बे मां

चंद्र मुकुट माथे पर सागर चरण रहे पखार
चार दिशाओं में गूंजे माता की जय जयकार

जीवन को संचारित करती शीतल पुरबाई अम्बे मां
अश्विन मास जो आया तो हर ओर है छाईं अम्बे मां

सारे अवगुण दुर्गुणों का नाश करेंगी मैया जी
सकल रोग पीडा़ का विनाश करेंगी मैया जी

साधु संतों के तप की है अमर रुबाई अम्बे मां
अश्विन मास जो आया तो हर ओर है छाईं अम्बे मां

पाप बढा़ तो मैया जी ने ही दुष्टों का संहार किया
अपने भक्तों का हरदम मैयाजी ने उद्धार किया

साथ में भक्तों के रहती बनकर परछाईं अम्बे मां
अश्विन मास जो आया तो हर ओर है छाईं अम्बे मां

लोभ मोह को जीवन का आधार कभी न करना
मैया के आगे खुद पर अहंकार कभी न करना 

पल में भारी पर्वत को करती हैं राई अम्बे मां 
अश्विन मास जो आया तो हर ओर है छाईं अम्बे मां

    द्वारा Vikram Kumar
    Shared26 Sep 2025
    Start26 Sep 2025
    End26 Sep 2030
    इस पर लोग क्या कह रहे हैं