नारी देवी का रूप है
नारी देवी का रूप है



ममता की शीतल छाया , करुणा की मीठी धूप है

इस जग की जननी नारी , नारी देवी का रुप है
इस जग की जननी नारी , नारी देवी का रुप है
खुशियों को वो सदा बांटती खुद गम के आंसू पीती
नारी वह जो खुद की नहीं औरों की खातिर जीती
आती जब बेटी बनकर आंगन में आती किलकारी
जाती जब दुल्हन बनकर सूनी कर जाती फुलवारी
पत्नी बनकर जिस पल आती पल वह बड़ा अनूप है
इस जग की जननी नारी , नारी देवी का रुप है
इस जग की जननी नारी , नारी देवी का रुप है
वह बहु बन ससुराल के सारे दु:ख सुख को अपनाती है
सास ससुर की बेटी बनकर उनका मान बढा़ती है
वह अपने बलिदान भाव से पिया के मन को भाती है
वह निश्चल, निस्वार्थ भाव को हरदम गले लगाती है
देवर और ननद की खातिर मां का ही प्रतिरुप है
इस जग की जननी नारी , नारी देवी का रुप है
इस जग की जननी नारी , नारी देवी का रुप है
जब बनती है मां तो महिमा और भी ज्यादा बढ़ जाती
ममतामयी नारी की गरिमा उच्च शिखर पर चढ़ जाती
वह सति, सावित्री,सीता है वह अनूसूया और मरियम है
वह त्याग, स्नेह, ममता, करुणा, की नदियों का संगम है
वह ढ़ल जाती हर रंग में , सभी किरदारों के अनुरुप है
इस जग की जननी नारी , नारी देवी का रुप है
इस जग की जननी नारी , नारी देवी का रुप है

    द्वारा Vikram Kumar
    Shared05 Mar 2025
    Start05 Mar 2025
    End05 Mar 2030
    इस पर लोग क्या कह रहे हैं