भोर की किरणों संग वह चली,
एक नई आशा, एक नई खुशी।
शंकाओं के बादल, आंधियों के बीच,
सपनों की उड़ान, ऊँचाइयों को खींच।
न बंधन रोकें, न जंजीर थामे,
उसकी हिम्मत, उसकी ठानें।
हर क़दम पर, हर राह पर,
आसमान में लिखे अपने नाम पर।
कहा था सबने, "मत दौड़ो धूप तक,"
पर देखो उसे, अब रुके ना वह।
सौ आवाज़ें, तेज़, प्रखर,
रंग भरें जग में, उज्ज्वल होकर।
हर लड़की जो सपने देखे,
हर नारी जो हौसला लेखे,
अब है घड़ी, खुला है गगन,
उड़ो निरंतर, न रुको, न झुको।