ज़िन्दगी

यह धूप छाँव से भरी ज़िंदगी जितनी खूबसूरत है उतनी ही गहरी और जटिल भी |

इसी सिलसिले में कुछ स्वरचित पंक्तियाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ |

***

ऐ ज़िन्दगी तेरे मायने से अन्जान रहे हम

ये सयानों की दुनियां में नादान रहे हम |

होकर अपनों से अपने से बेसुध बेखबर

लगाके गैरों से ये दिल पशेमान रहे हम ||

ऐ ज़िन्दगी तेरे मायने से अन्जान रहे हम

न तो उतरे न समझे तेरी गहराइयों को

रहे भटकते बस यहाँ वहां यूँ ही हरदम |

न तो तुझे न तेरे हम दस्तूर को समझे

बस बहक गए उधर जिधर ले गए कदम ||

ऐ ज़िन्दगी तेरे मायने से अन्जान रहे हम

थी हसरतें कि मिलें कुछ लम्हें सुकून के

बस इतना ही पाने को परेशान रहे हम |

सोचा था जियेंगे ज़िंदादिली से हर रोज़

जिंदा रहने को हर पल हैरान रहे हम ||

ऐ ज़िन्दगी तेरे मायने से अन्जान रहे हम

रहे आसमाँ पे छोड़ के पैरों से ये ज़मीं

रखीं ख्वाहिशें बहुत पर सब्र बहुत कम |

जब छूट गई ख्वाहिशें तो देखिये मज़ा

क्या मस्ती से ज़िन्दगी गुजार रहे हम ||

ऐ ज़िन्दगी तेरे मायने से अन्जान रहे हम

ऐ ज़िन्दगी तेरे मायने से अन्जान रहे हम

चंद्र मोहन कत्याल

ग्रेटर नॉएडा उत्तर प्रदेश-201310 भारत


    द्वारा chandra katyal
    Shared05 Jul 2026
    Start04 Jul 2026
    End05 Jul 2027
    इस पर लोग क्या कह रहे हैं