ठहराव(जीवन दर्शन)

एहसास एक पल उम्र का

सदियां गवाएं बैठा है,

जरा ठहरो और देखो

यादें छुपाए बैठा है,


बचपन जवानी और बुढ़ापा

निकल गया हलचल में,

न मिला समय रुकने का 

सब बीत गया पल-पल में,


याद करो अपने बचपन को

कैसे खेला करते थे,

छोटी हो या हो बड़ी 

हर बात पर लड़ा करते थे,


जैसे बीता बचपन

बात जवानी पर आयी,

मिलने लगा सब कुछ

फिर मन में उदासी छायी,


उम्मीदों के बोझ पर 

मन की आशाएं टूट गयी,

जीवन के इन संघर्षों में

सब यारा-यारी छूट गयी,


जब आया समय बुढ़ापे का

तो काया साथ ही छोड़ गयी,

मन की सभी उम्मीदों पर

देखो पानी फेर गयी,


फिर भी पागल ये मन

उम्मीदें लगाये बैठा है,

बेहतर हो ये जिन्दगी 

ये सपना सजाये बैठा है,


एहसास एक पल उम्र का

सदियां गवाएं बैठा है ।


    द्वारा Kapil Tiwari
    Shared05 Sep 2025
    Start05 Sep 2025
    End05 Sep 2030
    इस पर लोग क्या कह रहे हैं