21369123691modify ठहराव(जीवन दर्शन)एहसास एक पल उम्र कासदियां गवाएं बैठा है,जरा ठहरो और देखोयादें छुपाए बैठा है,बचपन जवानी और बुढ़ापानिकल गया हलचल में,न मिला समय रुकने का सब बीत गया पल-पल में,याद करो अपने बचपन कोकैसे खेला करते थे,छोटी हो या हो बड़ी हर बात पर लड़ा करते थे,जैसे बीता बचपनबात जवानी पर आयी,मिलने लगा सब कुछफिर मन में उदासी छायी,उम्मीदों के बोझ पर मन की आशाएं टूट गयी,जीवन के इन संघर्षों मेंसब यारा-यारी छूट गयी,जब आया समय बुढ़ापे कातो काया साथ ही छोड़ गयी,मन की सभी उम्मीदों परदेखो पानी फेर गयी,फिर भी पागल ये मनउम्मीदें लगाये बैठा है,बेहतर हो ये जिन्दगी ये सपना सजाये बैठा है,एहसास एक पल उम्र कासदियां गवाएं बैठा है ।LabelDirected by द्वारा Kapil TiwariShared05 Sep 2025Start05 Sep 2025End05 Sep 2030 The Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैंटिप्पणी लिखेंYuvit Sonu Jain18-Jun-2026CommentLikeवाह! बहुत उम्दा!ठहराव(जीवन दर्शन)© टिप्पणी400 characters remainingजमा करेंरद्द करें