युद्ध बनाम बर्बादी...
युद्ध बनाम बर्बादी...

खून खराबा संग सामुहिक  ...
विधा :काव्य  

बड़े आका बैठ बंकर में, 
युद्ध नीतियां गड़ते है ।
अहंकार को पोषित करते, 
और परस्पर भिड़ते है ।।

खून-खराबा संग सामुहिक, 
देखो जी कितना होता  ।
बर्बादी करते लोगों की,
दुख संकट  कितना  ढोता।।

सकल विश्व  बारुद ढेरी पे,
धूं‌-धूं कर  सुलग रहा है।
बंद करो ये खैल युद्ध का, 
कितना वो खून बहा है ।।

करवाएं समझौता जाकर ,
इस युद्ध को रूकवाओ।
कोई मसिहा उतर बीच में ,
थोड़ा उनको समझाओ।।

ये युद्ध नहीं अहंकार है 
ऐसे नहीं युद्ध  होता
सीखें कोई भारत से
कभी नहीं  आपा खोता।।

शौर्य शांति का सुमेल साधा,
कूटनिती  देखी होगी।
तभी उतरेंगे रण युद्ध में ,
जब सख्त जरूरत होगी।।

स्वरचित:अशोक दोशी

इस पर लोग क्या कह रहे हैं
  • बहुत सुन्दर कहानी! आगे जे वहाग का इंतज़ार रहेगा!🙏❤️🙏❤️🙏❤️🙏
  • वाह वाह! बहुत खूब! सुन्दर प्रस्तुति!
  • बहुत बढियाँ