196196modify मनहरण घनाक्षरी पर आधारित रचना (मनहरण घनाक्षरी छंद पर आधारित )शीर्षक : मन!मनुज जनम पाया,सत्य मार्ग अपनाया प्रभु को मन में ध्याया,कर्म योग धारिए।जीवन यशस्वी सदा,निराशा हो यदा-कदा,दुष्ट पर उठे गदा,शोषित को तारिए।खुल कर मनु जिया,अमिरस घट पिया,मार्ग आलोकित किया,मन को न मारिए।कभी मन की भी करो,जन की भी पीर हरो,खुद में विश्वास भरो,हार को नकारिए।स्वरचित तथा मौलिक,कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।LabelDirected by द्वारा कुसुम सुराणाShared30 Jun 2026Start30 Jun 2026End30 Jun 2027 The Critic’s Cornerइस पर लोग क्या कह रहे हैंटिप्पणी लिखेंमनहरण घनाक्षरी पर आधारित रचना © टिप्पणी400 characters remainingजमा करेंरद्द करें