विचार- विमर्श मन की बातें द्वारा - Sarita Sah8 months ago एक स्त्री को क्या चाहिए?जिसे मेरे जीवन के खास पल याद नहीं रहें.. क्या वह प्यार देगा? या ये चीजें पैसों से पूरे हो जाएंगे?पुरूष को क्या चाहिए?वह बहुत सी बड़ी स्थितियों से गुजर रहा होगा...लेकिन वह किसी ... Like1pts (1) Comment (2) सावन की रिमझिम बौछारें द्वारा - कनक पारख1 year ago सावन की रिमझिम बौछारें सरपट दौड़ा आया सावन, ले बदरी बौछार मलयज सौरभ ले हरसाया, भीनी सी रिमझिम फुहार। नभ से भू तक अगन हटी अब, चली ठंडी मस्त बयार गड़गड़ाहट, मेघा सरगम, गाएं हलध... Like1pts (2) Comment (3) सावन का मज़ा... द्वारा - कुसुम सुराणा1 year ago पगलाई घटाएँ बरस रही थी और माँ थी कि रट लगाएं बैठी थी, 'बेटा! छतरी लेकर जाना.. स्कूल'...अब माँ को कौन समझाएं? पहली बारीश में वो मिट्टी की सौंन्धी-सौंन्धी खुशबू, बूँद-बूँद से तन-मन को रोमांचित करती फुहा... Like1pts (1) Comment सावन की रिमझिम... द्वारा - कुसुम सुराणा1 year ago Like1pts (1) Comment (1) शुभ यात्रा, शुभांशु द्वारा - चंचल जैन1 year ago अंतरिक्ष में गूंजा जय हिंद, जय भारत।हमें गर्व है आप पर, शुभांशु, आपका अभिमान है।अंतरिक्ष में लहराया तिरंगा,हर भारत वासी हर्षित हैं।मेरा भारत महान है,सकल विश्व में विजयगान है।। चंचल जैन Like1pts (2) Comment (3) सावन का महीना है ये.......... द्वारा - Vikram Kumar1 year ago हरियाली,बाग,फूल और उपवन का महीनाबरसे फुहार मेघ और पवन का महीना भक्ति भाव में भी डूबे दिन सभी इसकेसावन का महीना है ये सावन का महीनाभगवान भोलेनाथ की भक्ति में डूबे लोगकांवर व जल का खूब हो रहा यहां ... Like1pts (2) Comment (5) सावन मन भावन.. द्वारा - अशोक दोषी1 year ago सावन मन भावन...सावन यह मन भावन पावन, तन मन सहज भिगोता है। बरसे अंबर से जब पानी, कृषक खेत को जोता है।१। रिमझिम रिमझि... Like1pts (1) Comment (3) सावन की रिमझिम बौछारें... द्वारा - कुसुम सुराणा1 year ago शीर्षक : पराया धन!पहले सावन की पहली बारीश!प्रकृति ने रची ये कैसी साजिश?यौवन-ज्वार में दहका तन-मन।रिमझिम बौछारों से भीगा मधुवन।प्रियतम मोह में उलझा आँचल,बाबुल द्वार की खनके साँकल।परिणीता-पीहर प्रथम पदा... Like1pts (2) Comment (3) आयी रिम-झिम बौछारें द्वारा - चंचल जैन1 year ago आयी रिमझिम बौछारेंरिमझिम बौछारों का आना,सावन का सुरमई तराना।मौसम अलबेला सुहाना,पिया संग प्रीत गुनगुनाना।।बरसी छमछम बूंदें, मोती मनहर,धरा-गगन उल्लसित हैं मंजर,झरते दुधिया झरने झर-झर-झर,पुष्प गलीचा रंगब... Like1pts (2) Comment (1) 'यूज एण्ड थ्रो' का दौर.. द्वारा - कुसुम सुराणा1 year ago 'यूज & थ्रो' का दौर'सारी दुनिया मेरी मुट्ठी में' के अहं में इंसान ने अपनी ही दुनिया को संकीर्ण दायरों में बांध रख्खा है! हमारी सोच कुपमेंढक सी हो गयी है !अंतरिक्ष की टोह लेने वाले हम इंसानी दिलों... Like1pts (2) Comment (5) वन वे, टू वे द्वारा - चंचल जैन1 year ago वन वे, टू वे, रन वे...प्यार, मोहब्बत, समर्पण, सहयोग, वैवाहिक जीवन में 'वन वे' मायने नहीं रखता।टू वे हो जीवन पथ। हाथों में साथी, हाथ हो।लेकिन इस हाथ से दो, उस हाथ से लो, वाले नीति नियम न हो। रिश्... Like1pts (4) Comment (4) क्यों? द्वारा - कुसुम सुराणा2 year ago 1. क्यों अस्त्र-शस्त्र-भण्डार पर बैठ, शान्ति-सन्देश दे रहे हो? रक्तवर्णी अम्बर पर ऐठ, श्वेत कबूतर मुक्त कर रहे हो? 2. क्यों रासायनिक अस्त्र-शस्त्र-क्रय-विक्रय में व्यस्त हो? विश... Like1pts (2) Comment (1) ये मोदी मोदी क्यों है.. द्वारा - कुसुम सुराणा2 year ago ये मोदी मोदी क्यों है.. कभी-कभी 'मोदीजी' से रश्क होने लगता है! आखिर ऐसा क्या है मोदी जी में जो वो मिडिया की सबसे 'फेवरेट' पर्सनालिटी बने हुए है ! मोदी … मोदी … मोदी 'वन मैन ... Like1pts (1) Comment (1) ये कहाँ आ गए हम? द्वारा - कुसुम सुराणा2 year ago शीर्षक : ये कहाँ आ गए हम? विकास का ढोल पिटते-पिटते ...ये कहाँ आ गए हैं हम? आये दिन अमानवीयता,अमानुषता, नृश्रृंशता , जुल्म के नए-नए कीर्तिमान स्थापित हो रहे हैं ... नैति... Like1pts (1) Comment (6)