कविताएँ पितृ-दिवस पर समर्पित रचना! द्वारा - कुसुम सुराणा15 days ago कौन कहता है, छोड़ गए हो, अजनबी जहाँ में!बाप्पा! जिन्दा हो आप हमारे मन-मंदिर में! सृष्टि के ज़र्रे-ज़र्रे में !!माँ की नम आँखों में, झलकता अक्स आपका!घर के कोने-कोने से, प्रतिध्वनित होते शब... Like1pts (1) Comment अब वो रातरानी से महकते अहाते कहाँ द्वारा - कुसुम सुराणा22 days ago अब वो रातरानी से महकते अहाते कहाँ? तेरे आगोश में सजती-सँवरती बातें कहाँ? अब वो मोहब्बत में तर-बतर रातें कहाँ? अब वो भँवरे की गुंजन वो बातें कहाँ? ख्वायिशे दफन जिम्मेदारियों क... Like1pts (2) Comment आज करूं मैं आरती तेरी द्वारा - अशोक दोषी23 days ago करूं आज मैं आरती तेरीधर के घृत मन दीपतेरे चरणों में शीश झुकाऊं,-2रख मोहे चरण समीपहे जी रे मैनें -२नत ननौं में ,नेह लिया संजोए है जी रे प्रभु , दर्श दीवाना तेरा तुझमें गया हूँ खोए... Like1pts (2) Comment Ashok Doshi Ji Solo Live Poetry Session आदरणीय अशोक दोशी जी का एकल लाइव काव्यपाठ सत्र द्वारा - ShadbKusum Admin24 days ago कल आदरणीय अशोक दोशी जी का एकल लाइव काव्यपाठ सत्र है। वार शुक्रवार, दिनांक 12 जून 2026, रात 8:00 बजे से 8:40 तक कृपया सभी लोग लाइव सेशन में शामिल होकर कार्यक्रम को सफल बनाइएँ। यदि आप इस लाइव सेशन में... Like1pts (3) Comment महंगाई की मार, आम आदमी बेजार द्वारा - कुसुम सुराणा25 days ago डस गई है नागिन, मची चीख-पुकार।महंगाई की मार, आम आदमी बेजार।।अन्नदाता के पीठ पर, पड़ी कोड़ों की मार।हालात के आगे, कृषक ने मानी हार।। कोविड की महामारी, कर गई प्रहार।प्रकृति से छेड़खानी, छीन गई बहार।।म... Like1pts (1) Comment मजदूर.. कितना मजबूर! द्वारा - कुसुम सुराणा27 days ago अकेलेपन के अंधेरों में,भटकता प्रवासी मजदूर,घर से दूर, थक कर चूर,मजदूर, कितना मजबूर!दो वक़्त रोटी की खातिर,दुत्कार सहने को मजबूर!पेट के गड्ढे भरता मजदूर, ढूंढ़े बासी रोटी के दो कौर!सगे सम्बन्धी न पर... Like1pts (2) Comment आओ सखी द्वारा - कुसुम सुराणा27 days ago नमन माँ शारदे🙏🙏रासावलय छंद आधारित रासावलय छंद: षटकल चौकल, षटकल पंचकल पदान्त : 212,122,221दिनांक : 9-6-2026आज सखी आओ, हो जाएं मदमस्त।बचपन को जी लें, खेलों में हो व्यस्त।दूध-दही न सही, पेड़ों के ... Like1pts (2) Comment चंदा मोहे न सोहे इस तन्हाई में द्वारा - Manoj Kumar Yakta30 days ago चंदा मोहे न सोहे, इस तन्हाई मेंलौटा दे तू उसे, इस जुदाई में कर दे कम दूरी मेरी...या रख ले तू परछाई में... रात के उनींदे है, विरह में छुपाए हैंये दर्द दिल के सारे, क्या रुलाए हैं अश्क ... Like1pts (3) Comment (1) आवाज द्वारा - Satyam Maurya2 months ago दुनिया में गूंजी होगी जब पहली आवाज वह गूंज किसने सुनी होगी कैसा रहा होगा मंजर जिसने भी सुनी होगी पहली आवाज कैसा महसूस किया होगा अपने अंदर आज कितने लोग कितनी आवाजें जब गूंज रही हैं दुनिया में त... Like1pts (3) Comment (1) लोभ मोह में उलझा मानव द्वारा - अशोक दोषी2 months ago दिनांक २७-५-२०२६विषय: लोभ मोह में उलझा मानव१६ १४ में प्रयास किया है विधा :ताटंक छंद लोभ मोह में उलझा मानव। धर्म आचरण को भूला।।व्यर्थ गुमाया जीवन अपना । वह अनमोल महा मू... Like1pts (2) Comment पार्श्व नाथ जिन स्तवन द्वारा - अशोक दोषी2 months ago तर्ज:केवट ने कहा रघुराई से प्रभु पार्श्व तुम्हारे चरणों में तेरा भक्त शीश झुकाता है  ... Like1pts (2) Comment आदी नाथ की स्तुति द्वारा - अशोक दोषी2 months ago तर्ज:आशुतोष शशांक शेखर,चन्द्र मौली चिदंबरा, आदिनाथ अरिहंत मेरे। प्रभु प्रथम जिनेश्वरा ।। दूर करो आतम के अंधेरे । हे मेर... Like1pts (2) Comment प्यार भी क्या बला है! द्वारा - कुसुम सुराणा2 months ago शीर्षक : प्यार भी क्या बला है....प्यार भी क्या बला है,कभी ऑनलाइन, कभी ऑफलाइन वाला चुटकुला है!शोडशी समझ लुटाया दिल,वह षष्ठी पार 'बाला' है...जिसके 'वर्चुअल बांहों' में बिताई चांदनी रात, वो खाँसता ब... Like1pts (3) Comment हँसगति छंद द्वारा - कुसुम सुराणा2 months ago हँसगति छंद :मात्रा भार 4 4 2 1 3 2 4 शीर्षक : कर्म योग! धर्म-कर्म का योग, कठिन है यारों। जिद्दी बन दो भोग, अटल पथ प्यारों। मानव भव संजोग, भाग्य अति भारी। सन्त चरण को पूज, सि... Like1pts (3) Comment गर्मी से हैरान/आंधी तूफान से परेशान द्वारा - अशोक दोषी2 months ago विधा दोहें #दिनांक;२०/०५/२६चले तेज लू आंधियां, पड़े जोर का ताप।मुश्किल में खग मनुज पशु, गर्मी पडे़ अमाप।१।देती हैं संताप दुख, अति गर्मी का कोप।कर देती बीमार ये, हुआ पवन का लो... Like1pts (5) Comment (1) मैं पूछूं प्रभुवर महावीर से द्वारा - अशोक दोषी2 months ago मैं पूछूं प्रभुवर.... मैं पूछूं प्रभुवर महावीर से , कब ज्ञान मिलेगा मुझे भगवन मैं पूछूं प्रभु वर महावीर से कब ज्ञान मिले... Like1pts (4) Comment (1) माँ! द्वारा - कुसुम सुराणा2 months ago माँ के लिए क्या लिखूं मैं,माँ की ही लिखावट हूँ मैं।माँ के गुणगान क्या करूँ मैं,माँ की ही खिलखिलाहट हूँ मैं।।सपनों का नीरव नभ है माँ।भंवरों का मधु गुंजारव है माँ।ममता का शामियाना हैं माँ।दुआओं सुधारस घ... Like1pts (3) Comment शिशु! द्वारा - कुसुम सुराणा2 months ago माँ के हाथ का झुनझुना,शिशु को कहाँ लुभाता है?ग्याझेट्स का रंगीन जमाना,लाडले को बहु भाता है।सुन मोबाइल की घंटी,नव-पल्लव खिल जाता है।बिखेर हँसी खूब बंटी,खींच मोबाइल ले आता है।।माँ के हाथ का मिष्टी... Like1pts (2) Comment12345>>