कविताएँ

कौन कहता है, छोड़ गए हो, अजनबी जहाँ में!बाप्पा! जिन्दा हो आप हमारे मन-मंदिर में! सृष्टि के ज़र्रे-ज़र्रे में !!माँ की नम आँखों में, झलकता अक्स आपका!घर के कोने-कोने से, प्रतिध्वनित होते शब...
अब वो रातरानी से महकते अहाते कहाँ? तेरे आगोश में सजती-सँवरती बातें कहाँ? अब वो मोहब्बत में तर-बतर रातें कहाँ? अब वो भँवरे की गुंजन वो बातें कहाँ? ख्वायिशे दफन जिम्मेदारियों क...
करूं आज मैं आरती तेरीधर के घृत मन दीपतेरे चरणों में शीश झुकाऊं,-2रख मोहे चरण समीपहे जी रे मैनें -२नत ननौं में ,नेह लिया संजोए है जी रे प्रभु , दर्श दीवाना तेरा तुझमें गया हूँ खोए...
कल आदरणीय अशोक दोशी जी का एकल लाइव काव्यपाठ सत्र है। वार शुक्रवार, दिनांक 12 जून 2026, रात 8:00 बजे से 8:40 तक कृपया सभी लोग लाइव सेशन में शामिल होकर कार्यक्रम को सफल बनाइएँ। यदि आप इस लाइव सेशन में...
डस गई है नागिन, मची चीख-पुकार।महंगाई की मार, आम आदमी बेजार।।अन्नदाता के पीठ पर, पड़ी कोड़ों की मार।हालात के आगे, कृषक ने मानी हार।। कोविड की महामारी, कर गई प्रहार।प्रकृति से छेड़खानी, छीन गई बहार।।म...
अकेलेपन के अंधेरों में,भटकता प्रवासी मजदूर,घर से दूर, थक कर चूर,मजदूर, कितना मजबूर!दो वक़्त रोटी की खातिर,दुत्कार सहने को मजबूर!पेट के गड्ढे भरता मजदूर, ढूंढ़े बासी रोटी के दो कौर!सगे सम्बन्धी न पर...
नमन माँ शारदे🙏🙏रासावलय छंद आधारित रासावलय छंद: षटकल चौकल, षटकल पंचकल पदान्त : 212,122,221दिनांक : 9-6-2026आज सखी आओ, हो जाएं मदमस्त।बचपन को जी लें, खेलों में हो व्यस्त।दूध-दही न सही, पेड़ों के ...
चंदा मोहे न सोहे, इस तन्हाई मेंलौटा दे तू उसे, इस जुदाई में कर दे कम दूरी मेरी...या रख ले तू परछाई में... रात के उनींदे है, विरह में छुपाए हैंये दर्द दिल के सारे, क्या रुलाए हैं अश्क ...
आवाज
द्वारा - Satyam Maurya
2 months ago
दुनिया में गूंजी होगी जब पहली आवाज वह गूंज किसने सुनी होगी कैसा रहा होगा मंजर जिसने भी सुनी होगी पहली आवाज कैसा महसूस किया होगा अपने अंदर आज कितने लोग कितनी आवाजें जब गूंज रही हैं दुनिया में त...
दिनांक २७-५-२०२६विषय: लोभ मोह में उलझा मानव१६ १४ में प्रयास किया है विधा :ताटंक छंद लोभ मोह में उलझा मानव। धर्म आचरण को भूला।।व्यर्थ गुमाया जीवन अपना । वह अनमोल महा मू...
तर्ज:केवट ने कहा रघुराई से प्रभु पार्श्व तुम्हारे चरणों में तेरा भक्त शीश झुकाता है  ...
तर्ज:आशुतोष शशांक शेखर,चन्द्र मौली चिदंबरा, आदिनाथ अरिहंत मेरे। प्रभु प्रथम जिनेश्वरा ।। दूर करो‌ आतम के अंधेरे । हे मेर...
शीर्षक : प्यार भी क्या बला है....प्यार भी क्या बला है,कभी ऑनलाइन, कभी ऑफलाइन वाला चुटकुला है!शोडशी समझ लुटाया दिल,वह षष्ठी पार 'बाला' है...जिसके 'वर्चुअल बांहों' में बिताई चांदनी रात, वो खाँसता ब...
हँसगति छंद :मात्रा भार 4 4 2 1 3 2 4 शीर्षक : कर्म योग! धर्म-कर्म का योग, कठिन है यारों। जिद्दी बन दो भोग, अटल पथ प्यारों। मानव भव संजोग, भाग्य अति भारी। सन्त चरण को पूज, सि...
विधा दोहें #दिनांक;२०/०५/२६चले तेज लू आंधियां, पड़े जोर का ताप।मुश्किल में खग मनुज पशु, गर्मी पडे़ अमाप।१।देती हैं संताप दुख, अति गर्मी का कोप।कर देती बीमार ये, हुआ पवन का लो...
मैं पूछूं प्रभुवर.... मैं पूछूं प्रभुवर महावीर से , कब ज्ञान मिलेगा मुझे भगवन मैं पूछूं प्रभु वर महावीर से कब ज्ञान मिले...
माँ!
द्वारा - कुसुम सुराणा
2 months ago
माँ के लिए क्या लिखूं मैं,माँ की ही लिखावट हूँ मैं।माँ के गुणगान क्या करूँ मैं,माँ की ही खिलखिलाहट हूँ मैं।।सपनों का नीरव नभ है माँ।भंवरों का मधु गुंजारव है माँ।ममता का शामियाना हैं माँ।दुआओं सुधारस घ...
शिशु!
द्वारा - कुसुम सुराणा
2 months ago
माँ के हाथ का झुनझुना,शिशु को कहाँ लुभाता है?ग्याझेट्स का रंगीन जमाना,लाडले को बहु भाता है।सुन मोबाइल की घंटी,नव-पल्लव खिल जाता है।बिखेर हँसी खूब बंटी,खींच मोबाइल ले आता है।।माँ के हाथ का मिष्टी...