प्रतियोगिता

माँ की कोख से,बंद मुट्ठियों मेंअपना नसीब ले आई।क्यूँ न स्वीकारुँ इसे, स्वयं द्वाराअर्जित पूँजी जो पाई।सुख-दुःख मान सम्मान के पीछे, छिपा है कर्म मतवाला।इसे न किसी ने दान में ही पाया, न ईश्वर ...
शीर्षक: नारी का सम्मानहमारे समाज में अक्सर महिलाओं को कमजोर समझ लिया जाता है, लेकिन यह सच नहीं है। महिलाएँ हमेशा से बहुत मजबूत और साहसी रही हैं। इस संसार में हर व्यक्ति को जन्म देने वाली भी एक महिला ह...
नारी शक्ति ईश स्वरूपा, रखती सबसे प्रीत। प्रताड़िता भी जग में होती, अधरों रखती जीत।। जोगीरासमता, ममता, सहनशीलता, जन्मों से है साथ। कंधे से कंधा लग चलती, साथ चले वो पाथ।। जोगीरानौ रूपों का रूप...
"नारी तू नारायणी" प्रतियोगिता हेतु कविता :-विषय- सपनों की उड़ान जागी चेतना नारी की,नभ में स्वप्न सुहाने,संघर्षों के कठिन शिखर अब उसके पहचाने।विपदाओं की भीषणता में साहस दीप जलाती,अदम्य धैर्य के दृ...
नारी, नारायणी...नारी हूँ सुमंगला, नर की मैं नारायणी।बेटी, भगिनी, प्रिया, माता मैं कल्याणी।।तारिणी, तेजस्विनी सृष्टि-सी मैं हूँ रमणी।सुहासिनी, गंग-सी मैं निर्मल निर्झरणी।।ममतामयी क्षमाशील धरा धीरज धारी...
नारी!
द्वारा - कुसुम सुराणा
4 months ago
नमन माँ शारदे 🙏🙏महा शशिवदना छंद।शीर्षक : सिंदूरी खेला!सिंदूरी खेला, खेला बहनों ने।मान बढ़ाया है, तमगे-गहनों ने।।नफ़रत-बीजों को, दुश्मन बोया है।अबला समझा है, उसने धोया है।।दूम सदा टेड़ी, कुत्ते की बढ़ती...
नारी, तू नारायणी! (प्रतियोगिता) विषय: 1. नारी सशक्तिकरण: व्यवधान या वरदान?"2. "सपनों की उड़ान"3. "क्या खोया, क्या पाया?" (किसी एक विषय पर लिखें या सभी तीन विषयों को एक ही...
संक्रांति, बिहु, पोंगल, लोहाड़ी का "आनंदोत्सव" लाइव कार्यक्रम 2 वार: गुरुवारदिनाँक : 15 जनवरी 2026समय: रात्री 9:15 बजे ShabdKusum.com Makar Sankranti Celebration - Part 2 - Zoom meeting link for 9:1...
संक्रांति, बिहु, पोंगल, लोहाड़ी का "आनंदोत्सव" लाइव कार्यक्रम 1 वार: गुरुवारदिनाँक : 15 जनवरी 2026समय: रात्री 8:15 बजे ShabdKusum.com Makar Sankranti Celebration - Part 1 - Zoom meeting link for ...
नवरात्रि के पावन पर्व पर आदि शक्ति माँ भवानी के चरणों पर 'भाव-सुमन अर्पण प्रतियोगिता' में सहभागिता हेतु अपनी कविता, लघुकथा तथा संस्मरण को माँ के पद-पंकज पर अर्पित कर स्वयं को सौभाग्यशाली बनाइएं! स्वाग...
पत्थर!
द्वारा - Pankaj Bindas
10 months ago
वो बड़ा पत्थर, भारी पत्थर, जिसे बड़ी मुश्किल से उठाकर रखा जाता है घास पर... तो घास उजड़ जाती है.. घास की जड़े मर जाती हैं! रखा जाता है मिट्टी पर... मिट्टी उड़ जाती है, बची-खुची मिट्टी काँप...
ज्ञान के दीप जलाकर, वो अंधियारा मिटाते हैं,भविष्य की राहों को, वो ही तो दिखाते हैं।संस्कारों की नींव पर, सपनों का भवन बनाते हैं,शिक्षक ही हैं, जो मानव को इंसान बनाते हैं। कलम ...
शिक्षक दिवस है ज्ञान, समर्पण और प्रेरणा का उत्सव, जो गढ़ते हैं व्यक्तित्व, बनाते हैं जीवन को स्वर्णिम एवं सुसंस्कृत।हर मार्ग पर जिनकी सीख बनती है रौशनी की किरण, ऐसे गुरुजनों को शत् शत्...
रक्षाबंधन विशेष साहित्यिक प्रतियोगिता ✨ भाई-बहन के पवित्र प्रेम और अटूट विश्वास का प्रतीक "रक्षाबंधन" सिर्फ एक धागा नहीं, भावनाओं की वो डोर है जो जीवन भर साथ निभाती है।इस पावन अवसर पर, आइए अपने मन की...
सभी साहित्यशिरोमणियों को सादर नमन! सावन की भीगी-भीगी ऋतु में टीम शब्दकुसुम ने एक ई-प्रतियोगिता का आयोजन करने का निर्णय लिया है। आप सभी साहित्यकार अपनी कविता, लघु कथा, लेख, ग़ज़ल, प्रेरक प्रसंग लिखिएं...
इस अंतरराष्ट्रीय कविता दिवस पर, हर किसी के लिए एक पुरस्कार! ✨ हमारे "रचनाओं का संगम" प्रतियोगिता में भाग लें। 📌 विषय: "एकाकीपन से मुक्ति का मेरा लेखन सफर" हर प्रतिभागी शब्दकुसुम कविता को आगे बढ़ाते...
शब्दकुसुम होली लेखन प्रतियोगिता 2025 🌸 ✍️ "रंगों में भीगें, शब्दों में जीएं!" ✍️ होली सिर्फ़ रंगों का नहीं, भावनाओं और यादों का उत्सव भी है! शब्दकुसुम प्रस्तुत करता है "होली विशेष लेखन प्रतियोगिता"...
✍️ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस लेखन प्रतियोगिता घोषणा ✍️ 📢 विषय:1️⃣ "नारी सशक्तिकरण: व्यवधान या वरदान?"2️⃣ "सपनों की उड़ान"3️⃣ "क्या खोया, क्या पाया?" (किसी एक विषय पर लिखें या सभी तीन विषयों को एक ही प...