नवीनतम पोस्ट << 161 162 163 164 165 166 167 168 169 170 171 172 173 174 175 176 177 178 179 180 >> Nov 4 नशा नाश का कारण... नशा नाश का कारण... नशा नाश का कारण... नाश करे संपत्ति, हैं नशा विनाश कारी।हानि, घात, नुकसान, विपत्ति अमंगलकारी।। सेवन से हो रोग, दुराचारी मन भाए।कंगाल निज संसार, अधोगति पंथ सुहाए।। लखपति बेघ... द्वारा चंचल जैन ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (5) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (3) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 दोहे.... दोहे.... माली सींचे बाग को, स्वेद खिलाये फूल| आयी ऋत रे बावरी, नाचे खग जग भूल ||1|| खाली बैठा बावरा, करे शिकायत रोज| बैठे-बैठे साहिबा, मिले न मिष्ठी भोज ||2|| जो नर भींचे आँख को,... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (3) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (4) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 दाम्पत्य जीवन... दाम्पत्य जीवन... दाम्पत्य जीवन की पराकाष्ठा यहीं कि जी रहे है, शीशे के बिखरें टुकड़ों को समेट अश्क़ पी रहे है! चाँद-सितारों की महफ़िल में अँधेरे निगल रहे है! कतरा-कतरा रोशनी के लिए मर-मर जी रहे है! ख... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (4) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (3) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 साँझ! साँझ! शीर्षक : प्यार की बरसात... गोधूलि की बेला है, सूरज निहायत अकेला है, आसमान ने लालिमा खोई है, घंटों निशा की राह जोई है! चाँद ने उपवस्त्र लहराया है, धरा को उबटन लगाया है! दु... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (3) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (3) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 अहिंसा भावना अहिंसा भावना अहिंसा भाव की बहेगी धारा मानवता का होगा उजियारा,दीपित सेवाधर्म संस्कार होगा,प्रेम, दया, करूणा का झंकारा।। विश्व शांति का सपना हो पूरा,जगती हो सद्भावना, भाईचारा,अलख सत्सेवा, परमानंद का,अहिंसा परमोधर्म... द्वारा चंचल जैन ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (3) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (6) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े << 161 162 163 164 165 166 167 168 169 170 171 172 173 174 175 176 177 178 179 180 >>