नवीनतम पोस्ट << 201 202 203 204 205 206 Nov 4 दगड़ाबाई चा गुत्ता! दगड़ाबाई चा गुत्ता! अमावस की रात में झींगुरों की झीं-झीं के बिच, सूखे पत्तों को रौंद कर एक आवाज़ रात की ख़ामोशी को चीरती हुई दगडाबाई के कानों में गर्म शीशे सी पहुँची और कुछ ही पलों बाद उसे ऐसे लगा मानों ... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (1) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (4) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 माँ भारती! माँ भारती! क्रान्तिकारीयों के रक्त-चन्दन से प्रक्षालित, भारत भूमि की प्रतिमा!स्वतंत्रता की देवी, जननी जन्मभूमि की परम उत्कर्षित गरिमा!विधायिका, न्यायपालिका, कार्यपालिका, मिडिया लोकतंत्र क... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (1) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (5) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 माँ भारती! माँ भारती! क्रान्तिकारीयों के रक्त-चन्दन से प्रक्षालित, भारत भूमि की प्रतिमा!स्वतंत्रता की देवी, जननी जन्मभूमि की परम उत्कर्षित गरिमा!विधायिका, न्यायपालिका, कार्यपालिका, मिडिया लोकतंत्र क... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (1) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (1) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 माँ भारती! माँ भारती! क्रान्तिकारीयों के रक्त-चन्दन से प्रक्षालित, भारत भूमि की प्रतिमा!स्वतंत्रता की देवी, जननी जन्मभूमि की परम उत्कर्षित गरिमा!विधायिका, न्यायपालिका, कार्यपालिका, मिडिया लोकतंत्र क... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (1) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (2) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 कृष्ण दीवानी! कृष्ण दीवानी! लाल-केसरिया रंग उछालती, आई मतवाली, चंचल शाम! अबीर, ग़ुलाल से रंगी चुनर, शरमाई राधा देख श्याम! अस्ताचल का रक्तिम सूरज, छुपा झुरमट के उस पार, अधरों पर ठहरी लोक-लाज अधीर मन की तकरार! कजरारे कान्ह... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (1) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (3) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े << 201 202 203 204 205 206