नवीनतम पोस्ट << 201 202 203 204 205 206 Nov 4 श्री गणेशाय नम: श्री गणेशाय नम: श्री गणेशाय नम: "वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघनम कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा" द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (2) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 आवरण! आवरण! आवरण: सहस्त्र रश्मियों ने खोले, कलियों के घूंघट, महकी फिज़ा, डोला तन-मन! बहकी हवाओं ने उंडेले, बादलों के अमृत घट, भीगी धरा, महका उपवन! पंखुड़ियों ने उतार फेंके, लज्जा के आवरण तोड़ी परंपराएं, झूठ... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (3) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 प्रेम दीवानी प्रेम दीवानी झुकी-झुकी पेड़ों की डालियाँ, मोतियों सी धान की बालियाँ, लदी-लदी सूरजमुखी की टहनियाँ, खिली-खिली गुलाब की पंखुडियाँ, सृष्टी को दिलों-जाँ से जता रही हैं प्यार..... अच्छा लगता है। सुध-बुध खो चूका पूर... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (2) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (2) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 मित्रता! मित्रता! शीर्षक : मित्रता! इतिहास के पन्नों पर अंकित मित्रता का प्रतिमान है, कृष्ण-सुदामा की मित्रता द्वारकाधिश की पहचान है! मित्रता तोली नहीं जाती सिक्कों से लदे तराजू में, रश्मियों का मूल्य आंकों घनघोर घ... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (2) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 देवकीनंदन देवकीनंदन देवकीनंदन! कंस की चीत्कार से कांपे, मथुरा कारागार के गलियारें! देवकी-वासुदेव के अंत:स में, छाए कृष्णपक्ष के अंधियारे! कैसी विडंबना किस्मत की, सोचे देवकी मय्या मन में! सात-सात स... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 2 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (1) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (3) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े << 201 202 203 204 205 206