दरार
अब टूट गया हू।।।। 

भाई अब टूट गया हूँ 

यह दर्द अब सहा नहीं जाता।।।। 

पता नहीं क्या हो गया हैं मुझे पर अब यह दुनियादारी का नाटक मुझसे किया नहीं जाता।।।।। 

एक एक करके सब दोस्त चले गए।।।। 
किसी के पास समय नहीं तो किसी का अब मतलब नहीं।।।। 

पता नहीं क्यों ऐसा करते हैं लोग।।।। समझ नहीं आता क्या चाहते क्या हैं लोग।।।  

एक कम उम्र का लड़का।।
नहीं नहीं उम्र तो बहोत हो गयी हैं
दुसरो का घडा भरते भरते खुद प्यासा रह गया हु मैं।।।। 

माँ को अच्छा बेटा चाइये।।  पिता को सफल बेटा चाइये।।
बीवी को मैं चाइये और भाई को भी मैं ही चाहीु
और दफ्तर को मेरी आत्मा चाइये।।।। 

और दोस्तों को कुछ नहीं चाइये।।।। 
सब व्यस्त जो हैं।।।। 

जो बुरे हैं मतलब नियत से बुरे नहीं ,
जिनसे मैं थोड़ा ठीक हु मतलब बेहतर हु।।।। 
उन्हें मैं चाइये।।। और जो मुझसे बेहतर हैं मुझे वो चाइये।।।।।। 

सबको बांटता बांटता खुद बट चूका हू।।। 
अब मुझे क्या चाइये।।।। 

दफ्तर से मैं खुश नहीं।।। माशूका मैं मेहफ़ूज़ नहीं।।। 
माँ बाप से नज़र चुराता हूँ।।। 
और भाई पर निर्भर नहीं।।।। 

मुझे क्या चाइये।।।। किसी को पता चले तो मेरा पता भी मुझे बताइये।।।।

धन्यवाद 

आपका यथार्थ 

    द्वारा Yatharth Puri
    Shared01 Apr 2026
    Start01 Apr 2026
    End01 Apr 2027
    इस पर लोग क्या कह रहे हैं