दरार
01 Apr 2026
अब टूट गया हू।।।। भाई अब टूट गया हूँ यह दर्द अब सहा नहीं जाता।।।। पता नहीं क्या हो गया हैं मुझे पर अब यह दुनियादारी का नाटक मुझसे किया नहीं जाता।…
कॉर्पोरेट दोस्त!
21 Jan 2026
मेरा दोस्त है एक कॉर्पोरेट मैं काम करता हैअच्छी सुंदर सफ़ेद शर्ट पहनता हैंऔर पेंट भी पहनता है....अरे हा पेन्ट तो सब पहेनते हैं....जूते थोड़े पुराने हैं पर चमका…
"दिल"
"दिल""दिल"जब भी इस शब्द को सुनते हैं।।। हमारे दिल में!!! हां हां !!!! दिल में ही।।।। हज़ारो सवाल आ जाते हैं।।।। इस चमचमाती रौशनी मैं इस चमकी…
"हार"
"हार""हार" हां मैं हार गया हु।।।। हां मैं हार गया हूँ शरीर की हर उस जकड़न से जिसने मुझे जकड रखा हैं।।। हां हां मैं हार ही गया हूँ।।।। क्या क्या रखा हैं इस ज़माने…
वाह!!!क्या खुबसुरत लिखा हैं आपने 😊🙏
आध्यात्मिक
आलेख
उपन्यास
एक्शन और रोमांच
कविताएँ
कहानियां
छोटी कहानियाँ
जुर्म की दास्तान
जासूसी
ज़िंदगी के किस्से
नैतिक कहानियाँ
नाटक
प्रतियोगिता
प्रेम कहानियाँ
प्रेरणादायक कहानियाँ
प्राचीन साहित्य
पारिवारिक
फैंटेसी
बाल-साहित्य
मुक्तक
मर्डर मिस्ट्री
यात्रा वृतांत
राजनैतिक
लेख
लघुकथा
विचार- विमर्श
स्त्री विशेष कहानियाँ
सस्पेंस और थ्रिलर कहानियाँ
संस्मरण
साइंस फिक्शन
सामाजिक कहानियाँ
हास्य – व्यंग्य
हॉरर कहानियाँ