मन का मृग
16 Mar 2026
यूं सुकूं हर पहर में ढूंढते रहते हैं हम ।खुद को ही घर में ढूंढते रहते हैं हम ।एक दुश्मन भी होता तो अच्छा होता,दोस्त क्यों शहर में ढूंढते रहते हैं हम ।शाख जिसकी…
सिखला दो ना पापा
27 Sep 2025
सिखला दो न पापाज़िन्दगी के गणित में मैं बहुत कच्चा हूँ,मुझे ज़िन्दगी का गणित सिखला दो न पापा।जोड़, घटाना, गुणा और भाग को,जीवन में लागू करना बतला दो न पापा ।मुझे…
अगली बार जब हम मिलेंगे
अगली बारजब हम मिलेंगेथोड़े मटमैले दिखेंगे।यादों से सने हुएपश्चाताप में डूबे हुए नहाए हुए।।अगली बारजब हम मिलेंगेहंसते हुए रो पड़ेंगे।टूट पड़ेगा यादों का बांधजो थ…
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