लहू के दो रंग
28 Jul 2025
लहू के दो रंग ✍️ Vijay Sharma Erry (1) वक़्त बदल गया, इंसान भी बदल गए, चेहरों पे मुस्कान, पर दिलों में जल गए। जहाँ फ़ायदा दिखा, वहाँ प्यार के संग, जहाँ मतलब नही…
आधुनिक दोहे...
26 Jul 2025
यह रहे कुछ दोहे (दोहों की शृंखला) समकालीन सामाजिक और राजनीतिक विडंबनाओं पर, हर दोहे में "एरी" (Erry) को प्रतीकात्मक रूप से जोड़ा गया है। ये दोहे कटाक्ष, व्यंग्य…
वो पहला प्यार...
25 Jul 2025
वो पहला प्यार ✍️ कवि – विजय शर्मा एरी (Vijay Sharma Erry) वो पहला-पहला एहसास था, न कोई वादा, न कोई प्यास था। बस उसकी एक मुस्कान थी, और दिल मेरा बेक़रार सा था। ल…
मेरे बचपन की यादें...
24 Jul 2025
मेरे बचपन की यादें ✍️ कवि - विजय शर्मा एरी (Vijay Sharma Erry) वो गलियाँ, वो चौपालें, वो मिट्टी की वो खुशबू, नंगे पाँव दौड़ना, वो बारिश की ठंडी बूंदू। कभी छत पर…
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