आध्यात्मिक दर्शन: विषय बनाम जीवन — पाश्चात्य अकादमिकता और भारतीय सभ्यतागत दृष्टि द्वारा - Ashwini Sharma6 months ago पाश्चात्य राष्ट्रों में दर्शनशास्त्र मूलतः एक एकेडेमिक डिसिप्लिन है, न कि जीवन जीने की पद्धति। वहाँ दर्शन को विश्वविद्यालयों में पढ़ाया जाने वाला एक विषय माना जाता है, ठीक वैसे ही जैसे इतिहास, समाजशास... Like1pts (2) Comment (1) भगवान नेम नाथ! द्वारा - अशोक दोषी12 months ago "वो वंदनीय हुए युगों तक "...जैन धर्म के २२ वें तीर्थकर अहिंसा उपासक परम चिंतक, परम ध्यानी, केवल ज्ञानी, भगवान कृष्ण के चचेरे भाई और रहनेमी के सगे भाई भगवान नेमीनाथ जी माता शीला देवी व पित... Like1pts Comment (2) कर्म की शक्ति और रहस्य द्वारा - SUSHIL JOSHI12 months ago गोस्वामी तुसलीदास रामायण में कहते हैं, कर्म प्रधान विश्व रचि राखा। जो जस करई सो तस फल चाखा। गोस्वामी तुसलीदास कहते है की अपने कर्म अनुसार ही सबको फल मिलता है। यह पूरा विश्व कर्म के नियम अनुसार... Like1pts (2) Comment (4) राम द्वारा - हरवंश हृदय1 year ago 🎍🚩🕉️🚩🎍कभी जलधि के सम्मुख तनकर क्रोध अग्नि से निखरे रामगोद में रख अनुज लखन को बिलख बिलख कर बिखरे रामयूं ही नहीं हुए पुरुषोत्तम, थीं पग पग कठिन परीक्षाएंप्रण को पूर्ण किया राघव ने, निज वादों ... Like1pts (3) Comment (6) माँ कात्यायनी! द्वारा - कुसुम सुराणा1 year ago नमस्तस्यै... नमस्तस्यै... माँ कात्यायनी! नमस्तस्यै!शक्ति पुंज तू, समर भवानी!आदिशक्ति तू, माँ कल्याणी!ब्रम्हांड व्यापिका, तू पाणिनी!करुणा स्वरुप तू, माँ मानिनी !नमस्तस्यै... नमस्तस्यै... माँ कात्यायनी!... Like1pts (4) Comment माँ जगदम्बा! द्वारा - कुसुम सुराणा1 year ago चैत्र मास वासंतिक आया , शुभारम्भ है खास।तेजस स्वरूप माँ जगदम्बा, जागी मन में आस।।खल संहारक मात भवानी, देना निर्भय दान।भारत भू का हर बाशिंदा, पाएं जग में मान।।स्वरचित तथा मौलिक,कुसुम अशोक सुराणा, मुंबई... Like1pts (2) Comment (2) चैत्र नवरात्र -अम्बे मां द्वारा - Vikram Kumar1 year ago सुख समृद्धि जग की खातिर लेकर आई अम्बे मांचैत्र मास जो आया तो हर ओर है छाईं अम्बे मांचंद्र मुकुट माथे पर सागर चरण रहे पखारचार दिशाओं में गूंजे माता की जय जयकारजीवन को संचारित करती शीतल पुरबाई अम्बे मां... Like1pts (3) Comment (2) “महाकुंभ" द्वारा - Janvi Karyani1 year ago “महाकुंभ"बाहर से गंगा स्नान और अंतर्मन मलिन काफ़ी है...सोचते हैं कुछ लोग गंगा स्नान से हर पाप की माफ़ी है...पुण्य का दिखावा करने वा... Like1pts (3) Comment (2) महाकुंभ द्वारा - Vikram Kumar1 year ago सनातन का मान और प्रचार महाकुंभ हैदेवर्षियों का तप है और विचार महाकुंभ हैजमावड़ा संतों का होता है बड़े उल्लास सेसंसार के संतों का तो संसार महाकुंभ है ऋषियों व मुनियों का दिया ज्ञान महाकुंभ है ... Like1pts (2) Comment (2) गुरु! द्वारा - कुसुम सुराणा2 year ago गुरु बिन ज्ञान कहां से पाऊ?अज्ञान तिमिर कैसे हर जाऊ?गुरु बिन कहाँ मिले है रिद्धि?सुवर्ण तपा जगमगाए जो बुद्धि!मैं बालक मंदबुद्धि, अबोध, अज्ञानी,वेद-शास्त्र, धर्म-मर्म कछु न जानी! गीता, कुरान, बाइब... Like1pts (4) Comment (1) शुभारम्भ! द्वारा - कुसुम सुराणा2 year ago नवरात्रि का हुआ शुभारंभ, रुण झुण करती आओ माँ!शारदीय नवरात्री का हुआ शुभारम्भ,नौ दुर्गा स्वरूप, दिखाओ माँ|शरद की अद्भुत छटा निराली,खिले फूल, मोतियों की बाली!अमृत कलश भर-भर लाई माई,रिद्धि-सिद्धि ले... Like1pts (3) Comment (6) कमल-कुसुम... द्वारा - कुसुम सुराणा2 year ago उजालों का प्रण लिए, रात भर जलता रहा दीया, स्नेह रीता-रीता, झेलता रहा दुनिया की दुश्वारियां! आँधियों से अकेला, लड़ता-झगड़ता रहा, उम्र भर, दीये तले तम के सायें ता-... Like1pts (6) Comment (2) सखी... द्वारा - कुसुम सुराणा2 year ago आचार्य श्री जी के मुखारविंद से जैसे ही साध्वी तेजस्विता जी का नाम साध्वीप्रमुखा के तौर पर जाहिर किया गया , सारा पंडाल ' हर्ष.. हर्ष' के नारों से गूंज उठा! सारा पंडाल ज्ञान-रश्मियों की ... Like1pts (5) Comment (2) राम... द्वारा - कुसुम सुराणा2 year ago राम बसे मोरे मन मंदिर में जैसे दूध-शहद ! राम छवि मोरे मन दर्पण में जैसे पूनम-शरद! कौशल्यासुत जन्मे अवध में, बजे ढोल-शहनाई! सखी-सहेलियाँ ले बलैया, गायें मंगल गीत-बधाई! ... Like1pts (6) Comment (1) पागल मनवा... द्वारा - कुसुम सुराणा2 year ago शीर्षक : पागल मनवा! पागल मनवा! क्यों अटका है मोहजाल में? तेरे जाने के बाद, पल-दो-पल में संभलेगा मतलबी संसार! अपने ढूंढेंगे तेरे तन के सुवर्ण-अलंकार! जमावड़ा लगेगा अजनबी रिश्... Like1pts (2) Comment (1) मित्रता! द्वारा - कुसुम सुराणा2 year ago शीर्षक : मित्रता! इतिहास के पन्नों पर अंकित मित्रता का प्रतिमान है, कृष्ण-सुदामा की मित्रता द्वारकाधिश की पहचान है! मित्रता तोली नहीं जाती सिक्कों से लदे तराजू में, रश्मियों का मूल्य आंकों घनघोर घ... Like1pts Comment (2) देवकीनंदन द्वारा - कुसुम सुराणा2 year ago देवकीनंदन! कंस की चीत्कार से कांपे, मथुरा कारागार के गलियारें! देवकी-वासुदेव के अंत:स में, छाए कृष्णपक्ष के अंधियारे! कैसी विडंबना किस्मत की, सोचे देवकी मय्या मन में! सात-सात स... Like1pts (1) Comment (3) श्री गणेशाय नमः। द्वारा - कुसुम सुराणा2 year ago वक्रतुण्ड महाकाय, सूर्यकोटि समप्रभ। निर्विघनम कुरु मे देव, सर्वकार्येषु सर्वदा।। Like1pts Comment (3)