नवीनतम पोस्ट << 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 >> Nov 4 नेह अमृत नेह अमृत झर-झर झरता निर्मल जल हैं,सावन बूंदों की मधुरिम सरगम हैं,मन मयूर नाचे हर्षित छम-छम,भर भर अंजुरी में ले लूँ, अमृत जल हैं।।चंचल जैन द्वारा चंचल जैन ऑथरपॉड 1 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (2) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (1) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 कालचक्र! कालचक्र! सहज नियति की मंजूरी से , ग्रह गतिमान होते हैं । कालचक्र कुदरत अधीन सभी, निश्चित कर्म पिरो... द्वारा अशोक दोषी ऑथरपॉड 1 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (3) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (3) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 सावन की रिमझिम... सावन की रिमझिम... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 1 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (1) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (1) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 आला पाऊस आला पाऊस आला पाऊस पाऊस,मनी फुलवित आस,धरतीला खुलवित,दरवळला सुवास.चंचल जैन द्वारा चंचल जैन ऑथरपॉड 1 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (1) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (1) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 ये कैसा मंजर? ये कैसा मंजर? ये कैसा फलक?ये कैसा मंज़र?इंसानियत बिलख रही,मानवता कराह रही!मय्यत का सामान,प्रकृति सजा रही!ये कैसी तरक्की,ये कैसी फतह?लाशों के अंबार पर,राजनीति फुदक रही!सत्ता के गलियारों में,रेवड़ियां बंट रही!ये कैसी ... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 1 year ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (2) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (2) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े << 81 82 83 84 85 86 87 88 89 90 91 92 93 94 95 96 97 98 99 100 >>