आलेख साधू संतों की सुरक्षा के लिए मुझ अकिंचन का चिंतन द्वारा - अशोक दोषी2 months ago विषय:साधु-संतों की सुरक्षा पर मुझ अकिंचन का चिंतन साधु-संतों की आए दिन सड़क हादसों में मृत्यु और हम अनुयायियों द्वारा "जय जय नंदा! जय जय भद्दा!" कहकर इति श्री कर लेना क्या यह उचित है? "ॐ शां... Like1pts (2) Comment (1) जरा मुस्कुरा दो... द्वारा - कुसुम सुराणा2 months ago मान्यवर! दिल खोल कर मुस्कुरा दो! यहां कंजूसी किस लिए? ऊपरवाले की मेहर है, रच्चणहारे का उपहार है…जम कर मुस्कुराओ ! हँस कर जीवन को उत्सव बनाओ!एक महाशय है हमारे मित्र! जब भी देखो ऐसे मुंह बनाएं रखते है म... Like1pts (3) Comment महाराष्ट्र दिनाच्या खूब खूब शुभकामना! द्वारा - कुसुम सुराणा2 months ago "जय जय महाराष्ट्र माझा, गरजा महाराष्ट्र माझा" Like1pts (3) Comment 🌹🌹🌹बुद्ध पूर्णिमा की अनन्त बधाइयाँ 🌹🌹🌹 द्वारा - कुसुम सुराणा2 months ago सरवर सुरभित सुमन, सोच सदा है शुद्ध। आँखे अविचल-अट... Like1pts (2) Comment बंगाल में BJP की आंधी3563 Exit Polls ने बढ़ाई सियासी गर्मी द्वारा - Stack Umbrella3 months ago पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है, और हाल ही में सामने आए एग्जिट पोल्स ने चुनावी माहौल को और भी गरमा दिया है। विभिन्न एजेंसियों द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, कुल 8 एग... Like1pts (3) Comment (1) बैसाखी की लख लख बधाइयाँ! द्वारा - कुसुम सुराणा3 months ago शीर्षक : बैसाखी!पंथ खालसा जन्मा, जश्न मनाने आओ।बैसाखी का मौका, खूब भाँगड़ा पाओ।।खेतों में लहराएं, पके धान की बाली।गिद्दा पा कर देती, कुडियाँ सब को गाली।। स्वरचित तथा मौलिक, द्वारा कुसुम अशोक सुर... Like1pts (1) Comment संविधान निर्माता को शत् शत् नमन! द्वारा - कुसुम सुराणा3 months ago रक्त चंदन से सुरभित माँ भारती! जननी जन्मभूमि! उतारू तव आरती। भारत माँ का सपूत भीम, दलित वंचित आंदोलन का जनक! भारतीय संविधान निर्माता, जन-अधिकार-कर्तव्य-उद्घोषक।। ... Like1pts Comment संविधान निर्माता को शत् शत् नमन! द्वारा - कुसुम सुराणा3 months ago रक्त चंदन से सुरभित माँ भारती! जननी जन्मभूमि! उतारू तव आरती। भारत माँ का सपूत भीम, दलित वंचित आंदोलन का जनक! भारतीय संविधान निर्माता, जन-अधिकार-कर्तव्य-उद्घोषक।। ... Like1pts Comment न चाहता हूँ तुम रुको , न चाहता हूँ मैं रुकूं। द्वारा - Akash Pandey4 months ago एक बार फिर से वो पुरानी हर याद ताज़ा हो गयी,फिर दिल सजाया हाथ में फ़रियाद ताज़ा हो गयी,कैसे कहूँ कि देखकर वर्षों पुरानी वो हंसी ख़ुश हूँ या ग़म में हूँ मगर हर बात ताज़ा हो गयी,कैसे ... Like1pts (2) Comment (1) क्या करूँ! द्वारा - Akash Pandey4 months ago चल रहे वर्षों से हैं जिसके लिए वो दूर कितने जिंदगी के छोर हैं,सीधा रहे तो तेज थोड़ा चल सकूँ इस रास्ते में और कितने मोड़ हैं, सुनता हूँ सब भागते थक जाते हैं मैं थक रहा हूँ चाल धीमी चल... Like1pts (1) Comment (2) ईद मुबारक द्वारा - कुसुम सुराणा4 months ago विश्व शांति की 'ईदी' मिले, इसी आरजू के साथ...सभी अमन के फरिश्तों को "ईद मुबारक"*शब्दकुसुम टीम* Like1pts (1) Comment शुभकामनाएं द्वारा - कुसुम सुराणा4 months ago चैत्री नवरात्री के शुभारम्भ तथा हिन्दू नववर्ष की अनन्त बधाइयाँ!*शब्दकुसुम टीम * Like1pts (1) Comment (1) जीवन की सच्चाई द्वारा - Akshu Agnihotri4 months ago जीवन कहने को एक छोटा सा शब्द है, लेकिन इसका अर्थ बहुत गहरा है। ‘जी’ का अर्थ सम्मान से भी जुड़ा है। जब हम किसी के नाम के साथ ‘जी’ लगाते हैं, जैसे रामजी या मोदीजी, तो वह हमारे मन का सम्मान और आदर प्रकट ... Like1pts (1) Comment (2) नारी, तू नारायणी! (प्रतियोगिता) विषय: 1. नारी सशक्तिकरण: व्यवधान या वरदान?" 2. "सपनों की उड़ान" 3. "क्या खोया, क्या पाया?" द्वारा - अशोक दोषी4 months ago हम देख रहे हैं कि इन पिछले साठ सालों में रहन-सहन, सामाजिक परिवेश, कौशल-कला, संगीत-साहित्य, परिपाटी-प्रथाओं में भारी बदलाव आया है। कितनी प्रथा-कुप्रथाएं विलुप्त हुई और कितनी प्रथाएं, कुप्रथाएं प्रचलित ... Like1pts (4) Comment (1) नेताजी सुभाष चंद्र बोस जी की जन्म जयंती पर कोटि कोटि वंदन! द्वारा - कुसुम सुराणा6 months ago "तुम मुझे खून दो...मैं तुम्हें आजादी दूंगा!"🌹क्रांतिवीर सुभाष चंद्र बोस जी🌹 Like1pts (1) Comment (1) शिक्षा का विकास प्रगति का उजास द्वारा - अशोक दोषी6 months ago २१-१-२०३६#विषय शिक्षा का उजास, प्रगति का विश्वास#विधा आलेखविषय: शिक्षा का उजास प्रगति का विश्वासहमारा सजग मंच सदैव सुंदर समसामयिक और समाजोपयोगी विषय देता है। हमारे मंच के प्रभारियों की यही खास बा... Like1pts (2) Comment वेनेजुएला से ग्रीनलैंड तक अमेरिका की बढ़ती दख़लअंदाज़ी और दुनिया के लिए ख़तरे की घंटी द्वारा - Farman Abbas6 months ago इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी महाशक्ति की आर्थिक या राजनीतिक पकड़ ढीली पड़ने लगती है, वह अपने प्रभाव को बनाए रखने के लिए सबसे पहले संसाधनों पर क़ब्ज़ा जमाने की कोशिश करती है। आज अमेरिका उसी मोड... Like1pts (2) Comment (1) संक्रांति, पोंगल, बिहु, लोहड़ी की लख लख बधाइयाँ! द्वारा - कुसुम सुराणा6 months ago "खुशियों का त्यौहार है आया।घर-घर आनन्द-उल्हास लाया।।सपनों को दिया सच का औरा।खेत खलिहान गएं यौवन से बौरा।।"कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई। Like1pts (2) Comment1234