आलेख

विषय:साधु-संतों की सुरक्षा पर मुझ अकिंचन का चिंतन साधु-संतों की आए दिन सड़क हादसों में मृत्यु और हम अनुयायियों द्वारा "जय जय नंदा! जय जय भद्दा!" कहकर इति श्री कर लेना क्या यह उचित है? "ॐ शां...
मान्यवर! दिल खोल कर मुस्कुरा दो! यहां कंजूसी किस लिए? ऊपरवाले की मेहर है, रच्चणहारे का उपहार है…जम कर मुस्कुराओ ! हँस कर जीवन को उत्सव बनाओ!एक महाशय है हमारे मित्र! जब भी देखो ऐसे मुंह बनाएं रखते है म...
"जय जय महाराष्ट्र माझा, गरजा महाराष्ट्र माझा"
सरवर सुरभित सुमन, सोच सदा है शुद्ध। आँखे अविचल-अट...
पश्चिम बंगाल की राजनीति इस समय बेहद दिलचस्प मोड़ पर खड़ी है, और हाल ही में सामने आए एग्जिट पोल्स ने चुनावी माहौल को और भी गरमा दिया है। विभिन्न एजेंसियों द्वारा जारी किए गए आंकड़ों के अनुसार, कुल 8 एग...
शीर्षक : बैसाखी!पंथ खालसा जन्मा, जश्न मनाने आओ।बैसाखी का मौका, खूब भाँगड़ा पाओ।।खेतों में लहराएं, पके धान की बाली।गिद्दा पा कर देती, कुडियाँ सब को गाली।। स्वरचित तथा मौलिक, द्वारा कुसुम अशोक सुर...
रक्त चंदन से सुरभित माँ भारती! जननी जन्मभूमि! उतारू तव आरती। भारत माँ का सपूत भीम, दलित वंचित आंदोलन का जनक! भारतीय संविधान निर्माता, जन-अधिकार-कर्तव्य-उद्घोषक।। ...
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रक्त चंदन से सुरभित माँ भारती! जननी जन्मभूमि! उतारू तव आरती। भारत माँ का सपूत भीम, दलित वंचित आंदोलन का जनक! भारतीय संविधान निर्माता, जन-अधिकार-कर्तव्य-उद्घोषक।। ...
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एक बार फिर से वो पुरानी हर याद ताज़ा हो गयी,फिर दिल सजाया हाथ में फ़रियाद ताज़ा हो गयी,कैसे कहूँ कि देखकर वर्षों पुरानी वो हंसी ख़ुश हूँ या ग़म में हूँ मगर हर बात ताज़ा हो गयी,कैसे ...
क्या करूँ!
द्वारा - Akash Pandey
4 months ago
चल रहे वर्षों से हैं जिसके लिए वो दूर कितने जिंदगी के छोर हैं,सीधा रहे तो तेज थोड़ा चल सकूँ इस रास्ते में और कितने मोड़ हैं, सुनता हूँ सब भागते थक जाते हैं मैं थक रहा हूँ चाल धीमी चल...
विश्व शांति की 'ईदी' मिले, इसी आरजू के साथ...सभी अमन के फरिश्तों को "ईद मुबारक"*शब्दकुसुम टीम*
चैत्री नवरात्री के शुभारम्भ तथा हिन्दू नववर्ष की अनन्त बधाइयाँ!*शब्दकुसुम टीम *
जीवन कहने को एक छोटा सा शब्द है, लेकिन इसका अर्थ बहुत गहरा है। ‘जी’ का अर्थ सम्मान से भी जुड़ा है। जब हम किसी के नाम के साथ ‘जी’ लगाते हैं, जैसे रामजी या मोदीजी, तो वह हमारे मन का सम्मान और आदर प्रकट ...
हम देख रहे हैं कि इन पिछले साठ सालों में रहन-सहन, सामाजिक परिवेश, कौशल-कला, संगीत-साहित्य, परिपाटी-प्रथाओं में भारी बदलाव आया है। कितनी प्रथा-कुप्रथाएं विलुप्त हुई और कितनी प्रथाएं, कुप्रथाएं प्रचलित ...
"तुम मुझे खून दो...मैं तुम्हें आजादी दूंगा!"🌹क्रांतिवीर सुभाष चंद्र बोस जी🌹
२१-१-२०३६#विषय शिक्षा का उजास, प्रगति का विश्वास#विधा आलेखविषय: शिक्षा का उजास प्रगति का विश्वासहमारा सजग मंच सदैव सुंदर समसामयिक और समाजोपयोगी विषय देता है। हमारे मंच के प्रभारियों की यही खास बा...
इतिहास गवाह है कि जब-जब किसी महाशक्ति की आर्थिक या राजनीतिक पकड़ ढीली पड़ने लगती है, वह अपने प्रभाव को बनाए रखने के लिए सबसे पहले संसाधनों पर क़ब्ज़ा जमाने की कोशिश करती है। आज अमेरिका उसी मोड...
"खुशियों का त्यौहार है आया।घर-घर आनन्द-उल्हास लाया।।सपनों को दिया सच का औरा।खेत खलिहान गएं यौवन से बौरा।।"कुसुम अशोक सुराणा, मुम्बई।