नारी संवाद नारी कमजोर नहीं, बल्कि शक्तिशाली है द्वारा - Akshu Agnihotri4 months ago हमारे समाज में अक्सर महिलाओं को मन से कमजोर माना जाता है, पर यह बिल्कुल सच नहीं है। महिलाएँ हमेशा से बहुत शक्तिशाली रही हैं। इस दुनिया में आदमी यह बात भूल जाते हैं कि उन्हें इस संसार में लाने वाली भी ... Like1pts Comment (1) कोहरा बनाम कोहराम! द्वारा - अशोक दोषी7 months ago विषय- कोहरा बनाम कोहराम विधा- संवादनिर्मला अपने बेटे आलेख को उठाते हुए: अरे बेटा आलेख जल्दी उठो,स्कूल जाने में देर हो जाएगीआलेख: झुंझलाहट में माॅं क्या तुम भी सुबह सुबह , तुम मुझे सोने... Like1pts (2) Comment (1) नारी सशक्तिकरण : व्यवधान या अपवाद द्वारा - Richa Malhotra1 year ago लेकर एक नया रूप वो जब जब एक परिवार में आई है...हां.. वो एक बेटी... एक बहन.. एक पत्नी... या एक मां कहलाई है...वैसे तो सब लोगों की जिम्मेदारी है उसके कंधों पर.. लेकिन फिर भी वो रहती सब के लिए पराई है...... Like1pts (5) Comment (7) नारी! द्वारा - Janvi Karyani1 year ago नारी होना भी एक अलग एहसास है...ना दिखने वाली कोई आदि शक्ति उसके पास है...हर नारी लगती तो साधारण पर बात सब में कोई ख़ास है...भेद होता आया साथ उसके, कल भी और आज है...कैसे भूल जाता है ये समाज कि ना... Like1pts (2) Comment (5) नारी को नमन द्वारा - Vikram Kumar1 year ago उनसे ही मिली जिंदगी है , और ये जीवन उनसे ही गुलजार यहां , ममता का चमन त्याग से उनके बड़ा न, कुछ जहां में है नारी दिवस पे दुनिया की हर नारी को नमन इतनी ममता से भरी दुनिया नहीं होती हम भी न होते... Like1pts (4) Comment (4) नारी देवी का रूप है द्वारा - Vikram Kumar1 year ago ममता की शीतल छाया , करुणा की मीठी धूप है इस जग की जननी नारी , नारी देवी का रुप है इस जग की जननी नारी , नारी देवी का रुप है खुशियों को वो सदा बांटती खुद गम के आंसू पीती नारी वह जो खुद की नहीं और... Like1pts (3) Comment (4) सुनो नारी द्वारा - Harshita Vyas1 year ago सुनो नारी नारी ही सृष्टि की निर्माता है तुम्हारी गोद में ही सम्पूर्ण विश्व समाता हैं,, तुम ही मां सरस्वती हो तुम ही लक्ष्मी हो तुम ही दुर्गा का रुप हो तुम ही बेटी हो तुम ही सहन हो तुम ही मा... Like1pts (3) Comment (4) नारी शक्ति द्वारा - कनक पारख1 year ago महिला दिवस प्रतियोगिता नारी ईश की अनुपम कृति है ईश अमूल्य उपहार । समग्र सृष्टि में नारी जैसा नहीं हुआ कोई सृजनहार। ममता, समता , स्नेह रंगों से किया जीवन का अमिट श्रृंगार।... Like1pts (3) Comment (6) नारी समाज की शक्ति द्वारा - Yogesh Awasthi1 year ago नारी है सृजन की धारा, नारी जीवन का आधार, नारी के बिन जग है अधूरा, नारी बिन सूना संसार। जब से सृष्टि ने आँखें खोली, तब से है उसका योगदान, ममता, शक्ति, प्रेम, करुणा, नारी है हर गुण की खान। ... Like1pts (5) Comment (7) मंज़िल मेरी दूर नहीं द्वारा - चंचल जैन1 year ago अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस प्रतियोगितामंज़िल मेरी दूर नहीं मुक्त हूं मैं रूढ़िवादी सोच से,उन्मुक्त नहीं।स्वतंत्र हूं अवांछनीय बंधनों से,स्वच्छंद नहीं।।संस्कारी मन, सुशील वर्तन, हौस... Like1pts (4) Comment (6) नारी सशक्तिकरण : व्यवधान या वरदान? द्वारा - कुसुम सुराणा1 year ago विश्व का मौजूदा माहौल हमें अंतर्मुख कर बहुत कुछ सोचने के लिए मजबूर कर रहा हैं! क्यों विश्व की आधी से अधिक आबादी दो वक्त की रोटी के लिए तरस रही हैं, अत्याचार से कराह रही हैं और तथाकथित महाशक्तियाँ... Like1pts (3) Comment (3) नि:शब्द पीड़.. द्वारा - कुसुम सुराणा1 year ago शाल-श्रीफल, तमगों-तोहफों का, खुमार अभी बाकी है!मय जो चढ़ी शोहरतों की, उतरनी अभी बाकी है!ढलते सूरज संग 'नारी-सम्मान' अंधियारे में गुम है!'ढाक के तीन पात' सा शोषण, उत्पीड़न, गुमसुम है!दरबारियो... Like1pts (3) Comment (2) नारी नारायणी द्वारा - चंचल जैन1 year ago अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस लेखन प्रतियोगितानारी नारायणीभारतीय संस्कृती नारी को परम प्रभु की सर्वश्रेष्ठ कृति मानती है। देवी-सा सम्मानित करती है। नारायण की नारी नारायणी है। पति की प्रिया, अर्धांगिन... Like1pts (3) Comment (3) कृष्ण दीवानी! द्वारा - कुसुम सुराणा2 year ago लाल-केसरिया रंग उछालती, आई मतवाली, चंचल शाम! अबीर, ग़ुलाल से रंगी चुनर, शरमाई राधा देख श्याम! अस्ताचल का रक्तिम सूरज, छुपा झुरमट के उस पार, अधरों पर ठहरी लोक-लाज अधीर मन की तकरार! कजरारे कान्ह... Like1pts (1) Comment (3) प्रेम दीवानी द्वारा - कुसुम सुराणा2 year ago झुकी-झुकी पेड़ों की डालियाँ, मोतियों सी धान की बालियाँ, लदी-लदी सूरजमुखी की टहनियाँ, खिली-खिली गुलाब की पंखुडियाँ, सृष्टी को दिलों-जाँ से जता रही हैं प्यार..... अच्छा लगता है। सुध-बुध खो चूका पूर... Like1pts (2) Comment (2)