छंद बाला छंद द्वारा - कुसुम सुराणा21 hours 48 minutes ago बाला छंद (वर्णिक छंद)3 रगण +गुरु = 10 वर्ण (212 212 212 2)रात में तारिका है लुभाती।चांदनी में नहाने बुलाती।।चन्द्रमा की कला मोह लेती। कुंतलों को खुला व्योम देती।।रागिणी मीत की गा रही है।मोहि... Like1pts Comment मनहरण घनाक्षरी पर आधारित रचना द्वारा - कुसुम सुराणा5 days ago (मनहरण घनाक्षरी छंद पर आधारित )शीर्षक : मन!मनुज जनम पाया,सत्य मार्ग अपनाया प्रभु को मन में ध्याया,कर्म योग धारिए।जीवन यशस्वी सदा,निराशा हो यदा-कदा,दुष्ट पर उठे गदा,शोषित को तारिए।खुल कर मनु जिया,... Like1pts (1) Comment चौपाई छंद आधारित रचना! द्वारा - कुसुम सुराणा6 days ago चौपाईचोरी कर बच निकला बन्दा।बढ़ चढ़ कहता दे दो चन्दा।कोतवाल खुद फिर कैसा डर।राम नाम का हूँ सौदागर।।अंदर-बाहर दूषित आनन।कलियुग का मैं भ्रमित दशानन।नरक लोक वासी मेरा तन।राम जन्म स्थल है अति पावन।।सेवक मन्... Like1pts (2) Comment (2) कुण्डलियाँ छंद द्वारा - कुसुम सुराणा7 days ago कुण्डलिया छंद!रघुवर का कर जाप तू , देता मन को शक्ति।पुरुषोत्तम प्रभु राम की, जन-जन करते भक्ति।जन-जन करते भक्ति, दर्श पा होते भावुक।कर्म बन्ध को तोड़, जोड़ता नाता नाजुक।सकल सत्कार-मान, मिले जो गुरु के ... Like1pts (1) Comment रासावलय छंद द्वारा - कुसुम सुराणा13 days ago नमन माँ शारदे🙏🙏रासावलय छंद आधारित गीत।रासावलय छंद: षटकल चौकल, षटकल पंचकल। पदान्त : 212,122,221दिनांक : 23-6-2026आस्था की चौखट, भगत भक्ति अपमान।प्रभु छवि कर धूमिल, करते क्यों अवमान।खुद उछाल कीचड़, रचा... Like1pts (1) Comment रासावलय छंद! द्वारा - कुसुम सुराणा1 months ago "बिखरते रिश्ते, सिमटते लोग"बिखर रहे रिश्ते, सिमट रहे घर-द्वार।मानवीय गुण का, बचा नहीं आधार।मनुज मनुज का है, दुश्मन अति खूंखार।विश्व पटल पर है, प्रिय झंडा बरदार।।राम नाम मुँह में, अमन-शान्ति का गान।हिं... Like1pts (2) Comment मनु! द्वारा - कुसुम सुराणा1 months ago महामंगला छंद आधारित अष्ठकल + 111, अष्ठकल + 21रच्चणहारे सकल, सृष्टि मातु के नाथ।मिट्टी से कर सृजन, मनुज वरद मति साथ।रिद्धि-सिद्धि पा अधिक, पगलाया मनु आज। अरिहंता बन अरिदल, करता दानव-काज।।अहंक... Like1pts (2) Comment तितली द्वारा - कुसुम सुराणा1 months ago रासावलय छंद आधारित गीत रासावलय छंद ( षटकल चौकल, षटकल पंचकल ) फूलों को तितली, दे चुम्बन सौ बार।घोल फिजा में मधु, जतलाती है प्यार।पगलाई तितली, उड़े पौध पुचकार।छूने से नाजुक, पंखुड़ियाँ बेज... Like1pts (2) Comment रासा छंद आधारित रचना द्वारा - कुसुम सुराणा2 months ago रासा छंद आधारित रचना!शीर्षक : वीरा!धरती-अम्बर को अब जोड़ो।आशाओं के गुल्लक फोड़ो।।बजने दो आँगन शहनाई।रंग बदलती ऋतु है ... Like1pts (3) Comment (1) पुष्पमाला छंद आधारित रचना द्वारा - कुसुम सुराणा2 months ago नमन माँ शारदे!🙏🙏पुष्पमाला छंद (वारातागा ) गीत!फूल सा खिलना यहाँ।गौरवान्वित हो जहाँ।।सूर्य को जो झेलते।रश्मियों से खेलते।राह सुरभित हैं करें।रंग जीवन में भरें।।खत्म जीवन है कहाँ। गौरवान... Like1pts (3) Comment कलाधर घनाक्षरी द्वारा - चंचल जैन3 months ago नमन माँ शारदेकलाधर घनाक्षरीदंभ द्वेष अग्नि तेज, ज्वाल स्वार्थ सोच हेज, दुष्ट भाव से विनाश, भ्रांत बुद्धि मानिए।।गाँव देश हो विशेष, वृक्ष ठाँव हो अशेष,गीत ताल नेह डोर, छाँव शीत पाइए।।नाथ थाम हाथ नित्य,... Like1pts (3) Comment अरुण छंद द्वारा - चंचल जैन3 months ago नमन माँ शारदेअरुण छंदमोद से, उल्लसित, भाव हिय शांति का।मेल से, मन मिले, अंत हो भ्रांति का।।प्रेम के, रंग में, इंद्रधनुषी जिया।पुष्पिता, हो धरा, हरितिमा वादियां।।दंभ का, द्वेष का, ... Like1pts (3) Comment (2) महामंगला छंद.. द्वारा - कुसुम सुराणा3 months ago नमन माँ शारदे!🙏🙏महामंगला छंद।गीत।शीर्षक : भरतार!रह जाती है सजन, मन की मन में बात।बैरी सारी प्रकृति, बैरी मधुमय रात।।चला गाँव से किशन, लेकर सपने आज, बेबस निरखे शहर, भूखा ढूंढे काज।मज़बूरी थ... Like1pts (2) Comment (1) समरांगण... द्वारा - कुसुम सुराणा3 months ago पुष्पमाला छंद मापनी २१ २२२ १२दिनांक : 24-04-2026शीर्षक : समरांगणविश्व समरांगण सजा।शंख रण में है बजा।शस्त्र हाटों पर बिके।ओस पलकों पर टिके।।आह मनु की जग सुने।चाह मखमल की बुने।ताप से दिल है ... Like1pts (2) Comment अंजनेय छंद आधारित रचना द्वारा - कुसुम सुराणा3 months ago नमन मा शारदे 🙏🙏अरुण छंद, गीत सादर समीक्षार्थ! विघ्न का , दम्भ का, अन्त खल राज का।होलिका, नित दहन, सच अटल आज का।। चल-अचल, वस्तु का, मोल है भोग से।हो दवा... Like1pts (1) Comment शब्दांजलि द्वारा - चंचल जैन3 months ago सम्राज्ञी सुर लय की आशा।तोडा आतम तन का पाशा।।सूना साज मन निराशा रे।हैं श्रद्धावनत हताशा रे।।चंचल जैन Like1pts (1) Comment महामंगला छंद आधारित कविता : बाज! द्वारा - कुसुम सुराणा3 months ago महामंगला छंद आधारित रचना।खो कर अपना वतन, देगा कैसे धीर।देख राष्ट्र का पतन, बढ़ी मनुज की पीर।युद्ध नाश की वजह, हथियारों की होड़।जागो जन-गण सकल, ढूंढो विधिवत तोड़।।सदा संप्रभु-सजग, हो मनु अपना देश।बुरी जहा... Like1pts (1) Comment (1) हंसगति छंद-बचपन! द्वारा - कुसुम सुराणा5 months ago नमन माँ शारदे 🙏🙏हंसगति छन्द 11+94 4 (21), 3242+2 समतुकान्त।सपने सारे आज, हुएं हैं सच्चे।चलो आज फिर बाग, बने हम बच्चे।।मन में है उल्हास, बदन में ऊर्जा।निर्मल अतिशय भाव, नहीं सिर कर्जा।।बचपन... Like1pts (2) Comment1234