नवीनतम पोस्ट 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 >> Nov 4 बाला छंद बाला छंद बाला छंद (वर्णिक छंद)3 रगण +गुरु = 10 वर्ण (212 212 212 2)रात में तारिका है लुभाती।चांदनी में नहाने बुलाती।।चन्द्रमा की कला मोह लेती। कुंतलों को खुला व्योम देती।।रागिणी मीत की गा रही है।मोहि... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 11 days ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (1) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 ज़िन्दगी ज़िन्दगी यह धूप छाँव से भरी ज़िंदगी जितनी खूबसूरत है उतनी ही गहरी और जटिल भी | इसी सिलसिले में कुछ स्वरचित पंक्तियाँ प्रस्तुत कर रहा हूँ | ... द्वारा chandra katyal ऑथरपॉड 11 days ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (1) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 मनहरण घनाक्षरी पर आधारित रचना मनहरण घनाक्षरी पर आधारित रचना (मनहरण घनाक्षरी छंद पर आधारित )शीर्षक : मन!मनुज जनम पाया,सत्य मार्ग अपनाया प्रभु को मन में ध्याया,कर्म योग धारिए।जीवन यशस्वी सदा,निराशा हो यदा-कदा,दुष्ट पर उठे गदा,शोषित को तारिए।खुल कर मनु जिया,... द्वारा कुसुम सुराणा ऑथरपॉड 16 days ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (1) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 मेरी नानी मेरी नानी मेरी नानी चुरमा लड्डू मीठे-मीठे,गोलमटोल बनाती नानी।।खूब खेलो, करो पढ़ाई, मीठी बातें करती नानी।। नानी खिलाती मेवा मलाई, रोज सुनाती नई कहानी।।पेड़ पौध पर प्यार जताती,नवांकुर को सहेजत... द्वारा चंचल जैन ऑथरपॉड 16 days ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (3) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (1) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े Nov 4 मायका मायका वो मायके का सुकूनपीहर की यादें मन को सताती रहती हैं। रोजमर्रा के काम काज से मुक्त हो क्षणात पीहर हो आता है मन। पुनः तरो-ताजगी साथ लेकर ससुराल आ जाता है। माना कि ससुराल भी उतना ही, मानो न मानो उससे भी ... द्वारा चंचल जैन ऑथरपॉड 16 days ago कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Like (2) कृपया पंजीकरण करे और आपका योगदान दे| Comment (1) पढ़ने के लिए लॉगिन/रजिस्टर करें पढ़े 1 2 3 4 5 6 7 8 9 10 11 12 13 14 15 16 17 18 19 20 >>