द्वारा - कुसुम सुराणा
5 months ago
भाग ९१गुलमोहर की छाँव में सभी चबूतरे पर बैठे हुएं थे। गर्म हवाएं बह रही थी। सुबह के साढ़े दस बजे भी उ...
       

द्वारा - कुसुम सुराणा
6 months ago
भाग 90वज्र को देख यश अचंभित था। उसे लगा था कि इतनी रात गए ड्राइवर आयेगा गाड़ी लेकर लेकिन यश के आगमन प...
       

द्वारा - कुसुम सुराणा
6 months ago
भाग 89यश का आज अंतिम मैच था। इसका प्रदर्शन अच्छा होना बहुत जरुरी था ताकि अंक तालिका में वह अव्वल रहे...
       

द्वारा - कुसुम सुराणा
7 months ago
भाग ८८यश की द्वितीय चयन प्रक्रिया के मैच शुरु हो चुके थे। देश के कोने-कोने से आएं खिलाडियों में स्पर...
       

द्वारा - कुसुम सुराणा
8 months ago
भाग ८७आबा  और प्रतिभा जी के पहुँचते ही आजी की आँखें चमकने लगी। वज्र भी घर पर ही था। भोजन व...
       

द्वारा - कुसुम सुराणा
8 months ago
भाग ८६लाली की तबियत में अब कुछ-कुछ सुधार नज़र आ रहा था। दगड़ा बाई का कलेजा मुँह में आ गया था परसो अपनी...
       

द्वारा - कुसुम सुराणा
8 months ago
भाग ८५आजी की बातें जानकी जी के मन में तांडव कर रही थी। 'पोरी चं लग्न कधी करतेस? काखेला कळसा अन गावाल...
       

द्वारा - कुसुम सुराणा
9 months ago
भाग ८४सुबह-सुबह लाली, अप्पा और दगड़ा बाई कराड के लिए रवाना हो चुके थे। लाली को रास्ते में तकलीफ न हो ...
       

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9 months ago
भाग ८३विभा के मानस पटल से उस नव-विवाहिता का  जला हुआ चेहरा जा ही नहीं रहा था। न जाने कितने सवाल...
       

द्वारा - कुसुम सुराणा
9 months ago
भाग ८२ विभा और जानकी जी लाली के साथ समय पर डाक्टर के यहाँ पहूँच गई थी। जाते-जाते वैदेही को जानक...
       

द्वारा - कुसुम सुराणा
10 months ago
भाग ८१भोर ने चाँद-सितारों से सजी काली रजाई फेंक दी और मिचमिची आँखों से प्राची की ऒर देखने लगी। बार-ब...
       

द्वारा - कुसुम सुराणा
10 months ago
भाग ८०अप्पा ने डॉक्टर से बात की और कल की अपॉइंटमेंट जो पहले से ही निश्चित थी उसे फिर एक बार मंजूरी द...
       

द्वारा - कुसुम सुराणा
10 months ago
भाग ७९सूरज पश्चिम की ऒर सरकने लगा था मानों कान्हा को देख राधा की वक्ष से ढलती चुनर। आसमान कुछ पलों क...
       

द्वारा - कुसुम सुराणा
10 months ago
भाग ७८शाम होते-होते आजी के दो बार फ़ोन आ गएं थे। वज्र ने विभा और यश को भी खाने के लिए रुकने को कहा ले...
       

द्वारा - कुसुम सुराणा
10 months ago
भाग ७७आबा के सासवड जाने के बाद वैदेही की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई थी। भले ही वह तीन दिन घर से काम करती...
       

द्वारा - कुसुम सुराणा
10 months ago
भाग ७६वज्र के दादाजी भास्कर राव जी का देहांत क्या हुआ आबा की सारी बिछी-बिछाई व्यापार की चौपट बिखर गई...
       

द्वारा - कुसुम सुराणा
10 months ago
भाग ७५ज्वालामुखी के भीतर उबलते लावा सा विभा के दिल के अंदर क्रोध उबल रहा था। पीड़िता मानसिक और शारीरि...
       

द्वारा - कुसुम सुराणा
10 months ago
भाग ७४विभा द्वन्द में फंस गई थी। एक तरफ न्याय की गुहार लगाने की मंशा तो दूसरी तरफ एक नाबालिग कमसिन क...
       

द्वारा - कुसुम सुराणा
10 months ago
भाग ७३मित्र-मण्डली कॉलेज की लायब्ररी में बैठी थी। वज्र और वैदेही की परीक्षा अप्रैल के अंतिम सप्ताह स...
       

द्वारा - कुसुम सुराणा
10 months ago
भाग ७२भविष्य के गर्भ में क्या है यह तो किसी को पता नहीं होता हैं लेकिन आज को देख कर कल का अनुमान लगा...
       

द्वारा - कुसुम सुराणा
10 months ago
भाग ७१यशवंत राव जी कराड के लोगों का स्नेह देख कर फूले न समाएं। उनके खानदान की ज़िन्दगी भर की मेहनत रं...
       
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