धारावाहिक ये प्यार ही तो ज़िन्दगी... द्वारा - कुसुम सुराणा5 months ago भाग ९१गुलमोहर की छाँव में सभी चबूतरे पर बैठे हुएं थे। गर्म हवाएं बह रही थी। सुबह के साढ़े दस बजे भी उनकी तपन महसूस हो रही था। गुलमोहर भी खामोश खड़ा था। न फूलों की बरसात न पत्तों की हलचल! पंछी भी डाल से ... Like1pts Comment ये प्यार ही तो ज़िन्दगी... भाग ९० द्वारा - कुसुम सुराणा6 months ago भाग 90वज्र को देख यश अचंभित था। उसे लगा था कि इतनी रात गए ड्राइवर आयेगा गाड़ी लेकर लेकिन यश के आगमन पर एक विजेता की तरह स्वागत करना था वज्र को यश का तो फिर जिगरी दोस्त तो हाजिर रहेगा ही न एयरपोर्ट पर! ... Like1pts (1) Comment ये प्यार ही तो ज़िन्दगी.. 89 द्वारा - कुसुम सुराणा6 months ago भाग 89यश का आज अंतिम मैच था। इसका प्रदर्शन अच्छा होना बहुत जरुरी था ताकि अंक तालिका में वह अव्वल रहे। आज गौरव सर ने सबको आमंत्रित किया था सुबह कोर्ट पर। 'हर कोई चाहता था एक मुट्ठी आसमान! ' लेकिन किसी ... Like1pts (2) Comment ये प्यार ही तो ज़िन्दगी... द्वारा - कुसुम सुराणा7 months ago भाग ८८यश की द्वितीय चयन प्रक्रिया के मैच शुरु हो चुके थे। देश के कोने-कोने से आएं खिलाडियों में स्पर्धा थी। इस स्तर पर खेलने का मतलब था काबिल खिलाड़ियों में अपने आप को बेहतर साबित करना। आज यश जी-जान से... Like1pts (2) Comment ये प्यार ही to ज़िन्दगी... द्वारा - कुसुम सुराणा8 months ago भाग ८७आबा और प्रतिभा जी के पहुँचते ही आजी की आँखें चमकने लगी। वज्र भी घर पर ही था। भोजन वगैरा निपट कर आबा आराम कर रहे थे और प्रतिभा जी अपनी बैग से खाने-पीने का सामान निकाल रही थी कि आजी ने ... Like1pts (1) Comment ये प्यार ही तो ज़िन्दगी... भाग ८६ द्वारा - कुसुम सुराणा8 months ago भाग ८६लाली की तबियत में अब कुछ-कुछ सुधार नज़र आ रहा था। दगड़ा बाई का कलेजा मुँह में आ गया था परसो अपनी एकलौती बेटी का हाल देख कर। आखिर इतना ज़िन्दगी से संघर्ष किस लिए था? अपनी बेटी का भविष्य उज्जवल हो इस... Like1pts (2) Comment (2) ये प्यार ही तो ज़िन्दगी...भाग ८५ द्वारा - कुसुम सुराणा8 months ago भाग ८५आजी की बातें जानकी जी के मन में तांडव कर रही थी। 'पोरी चं लग्न कधी करतेस? काखेला कळसा अन गावाला वळसा?' सामान्य परिस्थिति में वज्र का रिश्ता आता तो क्या जानकी जी इतना सोचती? लेकिन अब.. हार्ट ट्रा... Like1pts (1) Comment ये प्यार ही तो ज़िन्दगी... भाग ८४ द्वारा - कुसुम सुराणा9 months ago भाग ८४सुबह-सुबह लाली, अप्पा और दगड़ा बाई कराड के लिए रवाना हो चुके थे। लाली को रास्ते में तकलीफ न हो इसलिए गाड़ी तीन जगह ठहर कर आगे बढ़ने वाली थी। खालापुर आते ही सभी कुछ समय के लिए रुके। लाली, दगड़ा बाई व... Like1pts (1) Comment (1) ये प्यार ही तो ज़िन्दगी... भाग ८३ द्वारा - कुसुम सुराणा9 months ago भाग ८३विभा के मानस पटल से उस नव-विवाहिता का जला हुआ चेहरा जा ही नहीं रहा था। न जाने कितने सवाल उसके मन के दरया में हुलारें मार रहे थे। बार-बार लहरों से उठे प्रश्न किनारे पे आ कर, सिर टकरा कर वाप... Like1pts (2) Comment (1) ये प्यार ही तो ज़िन्दगी... भाग ८२ द्वारा - कुसुम सुराणा9 months ago भाग ८२ विभा और जानकी जी लाली के साथ समय पर डाक्टर के यहाँ पहूँच गई थी। जाते-जाते वैदेही को जानकी जी आजी के यहाँ छोड़ गई थी क्योंकि उन्हें कुछ ज्यादा वक़्त भी लग सकता था। वैदेही इकोनॉमिक्स की किताब ... Like1pts (1) Comment (1) ये प्यार ही तो ज़िन्दगी... भाग ८१ द्वारा - कुसुम सुराणा10 months ago भाग ८१भोर ने चाँद-सितारों से सजी काली रजाई फेंक दी और मिचमिची आँखों से प्राची की ऒर देखने लगी। बार-बार उसने पलके झपकी। प्राची के उस पर गेंदे की पंखुड़ियाँ उछालते ही भोर खिलखिला कर कहकहें लगाने लगी। उनक... Like1pts (1) Comment (1) ये प्यार ही तो ज़िन्दगी... भाग ८० द्वारा - कुसुम सुराणा10 months ago भाग ८०अप्पा ने डॉक्टर से बात की और कल की अपॉइंटमेंट जो पहले से ही निश्चित थी उसे फिर एक बार मंजूरी दे दी। विभा कॉलेज जा चुकी थी। अप्पा और लाली ही घर में थे। लाली डर-डर कर काम कर रही थी। कभी उसके हाथ स... Like1pts (1) Comment ये प्यार ही तो ज़िन्दगी... भाग ७९ द्वारा - कुसुम सुराणा10 months ago भाग ७९सूरज पश्चिम की ऒर सरकने लगा था मानों कान्हा को देख राधा की वक्ष से ढलती चुनर। आसमान कुछ पलों के लिए क्रोध से लालम-लाल हो गया लेकिन धीरे-धीरे चिंता महाठगनी के आँचल के भीतर छुपने लगा। प्रकृति उसकी... Like1pts (1) Comment (3) ये प्यार ही तो ज़िन्दगी.... भाग ७८ द्वारा - कुसुम सुराणा10 months ago भाग ७८शाम होते-होते आजी के दो बार फ़ोन आ गएं थे। वज्र ने विभा और यश को भी खाने के लिए रुकने को कहा लेकिन उन्हें प्रैक्टिस के किए जाना था। यश ने विभा को उसके लैपटॉप में अकाउंटिंग के लिए 'झोहो' (Zoho) सॉ... Like1pts (1) Comment (1) ये प्यार ही तो ज़िन्दगी.... भाग ७७ द्वारा - कुसुम सुराणा10 months ago भाग ७७आबा के सासवड जाने के बाद वैदेही की जिम्मेदारी और भी बढ़ गई थी। भले ही वह तीन दिन घर से काम करती थी लेकिन 'वज्र एक्सपोर्ट हाउस' का कामकाज देश-विदेश में फैला हुआ था। सभी मूल्यवान ग्राहकों कों सही त... Like1pts (1) Comment (1) ये प्यार ही तो ज़िन्दगी... भाग ७६ द्वारा - कुसुम सुराणा10 months ago भाग ७६वज्र के दादाजी भास्कर राव जी का देहांत क्या हुआ आबा की सारी बिछी-बिछाई व्यापार की चौपट बिखर गई थी। अब तक भास्कर राव जी गाँव का सारा कारोबार सँभालते थे तो आबा को वहाँ की बिल्कुल चिंता नहीं थी। प्... Like1pts (1) Comment (2) ये प्यार ही तो ज़िन्दगी.. भाग ७५ द्वारा - कुसुम सुराणा10 months ago भाग ७५ज्वालामुखी के भीतर उबलते लावा सा विभा के दिल के अंदर क्रोध उबल रहा था। पीड़िता मानसिक और शारीरिक संत्रास भुगत रही थी और अपराधी खुलेआम घूम रहा था। बेचता तो वह फूल था लेकिन अपने स्वार्थ के लिए, अपन... Like1pts (2) Comment ये प्यार ही तो ज़िन्दगी.. भाग ७४ द्वारा - कुसुम सुराणा10 months ago भाग ७४विभा द्वन्द में फंस गई थी। एक तरफ न्याय की गुहार लगाने की मंशा तो दूसरी तरफ एक नाबालिग कमसिन कली का भविष्य जिसने अभी-अभी सूर्यकिरणों के दर्शन कर अपनी नन्ही-नन्ही आँखें खोली थी दुनिया को अपलक निह... Like1pts (3) Comment (1)12345>>